चीन और पाक की खैर नहीं, आ रहा है दुश्मनों का काल ‘Super Sukhoi’

भारत ने अपनी रक्षा प्रणाली को विकसित और मजबूत करने की दिशा में कदम आगे बढ़ा दिए हैं। भारत के पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान से बढ़ते खतरे को देखते हुए अब भारतीय सीमाओं की सुरक्षा को चाक चौबंद किया जा रहा है। भारत तेजी से रक्षा सौदे कर रहा है। इन सौदों में फ्रांस के साथ राफेल लड़ाकू विमान सौदा अंतिम स्तर पर है। लेकिन जरूरत को देखते हुए अब भारत ने अपने पुराने सहयोगी रूस के साथ अहम समझौता किया है।

दुश्मनों का काल कहा जाने वाला Super Sukhoi जल्दी ही भारतीय एयरफोर्स में शामिल होगा। भारत रुके हुए इस प्रोजेक्ट पर काम आगे बढ़ाने की तैयारी में है। रूस के सहयोग भारत जल्दी ही 5वीं जेनरेशन के लड़ाकू विमानों के लिए सुखोई को Super Sukhoi में बदलने के लिए समझौता करेगा। हालांकि भारत ने पहले ही फ्रांस के साथ 36 राफेल लड़ाकू विमानों का सौदा किया है, लेकिन रक्षा सूत्रों के मुताबिक वो काफी नहीं है।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक देश की सुरक्षा को अभेद बनाने के लिए 36 लड़ाकू विमान काफी नहीं है। फिलहाल के हालात पर नजर डालें तो अभी भारत के पास 33 लड़ाकू विमान हैं। इनमें से 11 विमान काफी पुराने हो चुके हैं। वहीं दूसरी तरफ मिग 21 और मिग 27 रिटायरमेंट की कगार पर हैं। इन्हे धीरे-धीरे वायुसेना से हटाया जा रहा है। मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से लगातार भारतीय वायुसेना को मजबूत बनाने की कोशिश चल रही है।

खास बात ये है कि रक्षा के क्षेत्र में भी मेक इन इंडिया को बढ़ावा दिया जाएगा। बताया जा रहा है कि चीन और पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारतीय वायुसेना को कम से कम 42 लड़ाकू विमानों की जरूरत है। देश में स्वदेसी तकनीस से भी विमान बनाए जा रहे हैं। तेजस के बाद अब दूसरे लड़ाकू विमानों को लॉन्च करने की तैयारी चल रही है। इसके अलावा अमेरिकी एफ-18 और एफ-16 के साथ ही स्वीडन के ग्रिपन ई को भारत में बनाने की तैयारी है. साफ है कि अब इन विमानों को मेक इन इंडिया टैग के साथ लॉन्च किया जाएगा।

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक भारत लड़ाकू विमानों की तकनीक और कीमत संबंधी मुद्दों से निपटने की तैयारी कर रहा है। इस काम में रूस भारत की मदद कर रहा है। आपको बता दें कि भारत और रूस के बीच सबसे पहले 2007 में लड़ाकू विमानों की शुरुआती डिजाइन के लिए 295 मिलियन डॉलर का सौदा हुआ था। हालांकि बाद में इसे 2010 के लिए बढ़ा दिया गया था।

सुखोई को Super Sukhoi में बदलने की कवायद शुरू हो गई है। जिसके तहत भारत अब फिफ्थ जनरेशन के फाइटर प्लेन बनाने की तैयारी कर रहा है। इस योजना के तहत भारत और रूस अगले 6 साल के लिए प्रोटोटाइप डेवलपमेंट, टेस्टिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए करीब 4 बिलियन डॉलर की डील करने जा रहे हैं। Super Sukhoi एक सिंगल सीट लड़ाकू विमान होगा। ऐसे 127 लड़ाकू विमान बनाने में करीब 25 बिलियन डॉलर का खर्च आएगा.

भारत के रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होने कहा कि भारत के लिए सुखोई की उपयोगिता काफी बढ़ गई है। पार्रिकर ने कहा कि हमारा लक्ष्य सुखोई की उपयोगिता को 75 फीसदी तक करना है। रक्षा मंत्री के मुताबिक सुखोई को बेहतर बनाने के लिए रूस, हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स और भारतीय वायुसेना मिलकर काम करेंगे. सभी मिलकर Super Sukhoi बनाएंगे.

आपको बता दें कि Super Sukhoi में एक्टि‍व इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे रडार और लॉन्ग रेंज स्टैंड ऑफ मिसाइल जैसी एडवांस तकनीक होगी। सुखोई एक घंटे में 2450 किमी तक पहुंच जाता है। एक बार उड़ान भरने के साथ वह आठ हजार किलो तक के हथियार लेकर 5200 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है। की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ये एक घंटे में 2450 किमी तक पहुंच जाता है। एक बार उड़ान भरने के बाद ये लड़ाकू विमान आठ हजार किलो तक के हथियार लेकर 5200 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है। जाहिर है कि सुपर सुखोई की खबर सुनकर चीन और पाकिस्तान का कांपना लाजमी है। इस विमान के आने के बाद भारतीय वायुसेना से मुकाबला करना किसी भी देश के लिए मुश्किल होगा।