उमा भारती की 2 साल की पदयात्रा, गंगा सफाई के लिए या यूपी जीतने के लिए?

पीएम मोदी ने जब 2014 में अपने निर्वाचन के लिए वाराणसी की सीट को चुना था तो उस वक्त उन्होंने कहा था कि उन्हें मां गंगा ने बुलाया है। जीतने के बाद वो गंगा किनारे गए थे, गंगा आरती में भी शामिल हुए थे। उनकी सरकार ने गंगा सफाई के लिए  जल-संसाधन मंत्रालय का पुनर्गठन किया और इसका नाम ‘जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनर्जीवन मंत्रालय’ किया। यानी गंगा सफाई के लिए मंत्रालय ही बन गया। गंगा सफाई के लिए नमामि गंगे नाम से पीएम का ड्रीम प्रोजेक्ट भी है जिसके तहत तीन चरणों में गंगा की सफाई होनी है, इसमें अल्पकालिक से लेकर पांच वर्ष की दीर्घावधि योजना भी शामिल है। फिलहाल सब कुछ ठप पड़ा हुआ है, लेकिन केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती अब 2,525 किलोमीटर में फैली गंगा की सफाई के काम में तेजी लाने की तैयारी में हैं।

गंगा सफाई के लिए जल संसाधन और गंगा पुनर्जीवन मंत्री उमा भारती अब गंगा किनारे पदयात्रा करने वाली हैं। सरकार, एनजीओ और जनता मिलकर गंगा सफाई और गंगा के कायाकल्प का काम करते रहेंगे, वहीं गंगा पुनर्जीवन मंत्री उमा भारती दो साल तक हर हफ्ते दो या तीन दिन गोमुख से लेकर गंगासागर के बीच गंगा किनारे पदयात्रा करेंगी। उनका कहना है कि इस तरह कदम दर कदम नापते हुए वो गंगा और गंगापुत्रों की मुश्किलें आसानी से समझ पाएंगी, तब समस्या का स्थायी उपाय करना ज्यादा सहज होगा ताकि गंगा को फिर से स्वच्छ, निर्मल और अविरल करने का लक्ष्य पा सकें।

उमा की ये पदयात्रा अक्टूबर 2016 से शुरू होगी और अक्टूबर 2018 तक चलेगी। वो कहती हैं कि गंगा की सफाई के लिए एक्ट भी बनेगा तो वो जनता की इच्छा के मुताबिक और पदयात्रा के जरिए जब वो समस्याओं को समझ चुकी रहेंगी तो सुझाव देने में उन्हें भी आसानी रहेगी। वो खासकर गंगा किनारे रहने वाले लोगों की इच्छा के मुताबिक सुझाव दे सकेंगी क्योंकि वो ही लोग गंगा को सबसे ज्यादा सबसे बेहतर तरीके से समझते हैं और संवेदनशील भी हैं।

उमा भारती ने अपनी यात्रा के लिए जो वक्त चुना है, उस पर गौर करने पर इस यात्रा की अहमियत ज्यादा समझ में आती है। अक्टूबर से करीब 4 महीने बाद उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दोनों ही राज्यों में विधानसभा के चुनाव हो रहे होंगे और जब उनकी ये यात्रा पूरी होगी यानी अक्टूबर 2018 तो उसके करीब 6 महीने बाद 2019 के लोकसभा चुनावों का वक्त होगा। ऐसे में बड़ा स्वाभाविक लगता है कि उमा भारती गंगा सफाई के बहाने एक बड़े वोटबैंक को भी लुभाने निकलेंगी जो कि कभी बीजेपी का होता था लेकिन आजकल छिटक गया प्रतीत होता है।

उमा पिछड़े वर्ग से आती हैं, वो बीजेपी में अहम पदों पर रहीं और पिछड़े वर्ग खासतौर से लोध वोटों को बीजेपी से जोड़े रहीं। बाद में वह मध्यप्रदेश चली गईं, लेकिन तब इसी जाति के कल्याण सिंह इस वोट बैंक को बीजेपी के साथ रखने में सफल रहे। लेकिन बीच के कुछ वक्त में कल्याण सिंह की बीजेपी की दूरी और बाद में कम सक्रियता से लोध वोटबैंक बीजेपी से छिटक गया। यूपी को जीतने के लिए बीजेपी इस बार गैर यादव पिछड़ी और अतिपिछड़ी जातियों पर फोकस किए हुए हैं, ऐसे में वो कभी अपने रहे लोध वोटबैंक को जोड़ने की हरसंभव कोशिश में लगी है।

माना जा रहा है कि उमा भारती की दो साल चलने वाली पदयात्रा का पहला निशाना लोध वोटबैंक ही हैं, गंगा सफाई भी साथ में होती रहेगी। उनकी यात्रा का पहला चरण उत्तराखंड तो एक-दो महीने में निपट जाएगा। उत्तर प्रदेश के चुनावों के प्रचार का जब असल वक्त होगा और यूपी विधान सभा चुनाव नजदीक आएगा तो उमा भारती भी उत्तराखंड से यूपी में दाखिल हो जाएंगी। ये अच्छा संयोग ही है कि यूपी में गंगा जहां से गुजरती है वहां की पदयात्रा में लोध बहुल इलाके भी कवर हो रहे हैं। बुलंदशहर, फर्रूखाबाद, कानपुर और पूर्वांचल का बड़ा हिस्सा गंगा किनारे आता है।

पूर्वांचल और गंगा के आसपास के इलाकों में लोध, कुर्मी और कोइरी वोटों की हिस्सेदारी 15 फीसदी तक है। ये संख्या उत्तर प्रदेश में पिछड़ा वर्ग की कुल जातियों के 42 से 45 फीसदी तक के वोटबैंक में अच्छी-खासी है। बीजेपी ने कुर्मी वोटरों के लिए अनुप्रिया पटेल, कोइरी वोटरों के लिए यूपी प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य, स्वामी प्रसाद मौर्य को लगाया हुआ है तो लोध वोटों का जिम्मा उमा भारती के पास होगा। मायावती से दलितों को छीनने का काम रामदास आठवले जैसे नेता करेंगे।

बीजेपी ने एक-एक जाति के लिए रणनीति बनाई हुई है और गंगा सफाई के लिए उमा भारती जब गंगोत्री से गंगासागर की पदयात्रा पर निकलेंगी तो वो इस रणनीति पर अमल करते हुए आगे बढ़ेंगी। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के चुनाव निपट जाएंगे तो भी वो इसी रणनीति पर बढ़ेंगी क्योंकि आगे बिहार और बंगाल जैसे राज्य होंगे और पिछड़े वर्ग की नेता मानी जाने वाली उमा अपने ओजस्वी भाषणों से इन राज्यों में भी अपना असर दिखाने में कोई कमी नहीं छोड़ेंगी।