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हिमाचल 200 गहरी खाई मे गिरी जीप, छह तीर्थयात्रियों की मौत

हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिले में शुक्रवार को एक जीप लुढ़ककर 200 फुट गहरी खाई में जा गिरी। इस घटना में छह तीर्थयात्रियों की मौत हो गई। पीड़ित भरमौर घाटी में स्थित भगवान शिव की पवित्र स्थली, मणिमहेश झील जा रहे थे।
यह दुर्घटना दुघली नाले के पास घटी, जो चंबा जिला मुख्यालय से कोई 20 किलोमीटर दूर है।

मृतकों की उम्र 25 से 30 वर्ष थी। इनकी पहचान पंकज बलोरिया, जसवंत सिंह, अभिनेष, समशेर सिंह, अनिल कुमार और सोनू के रूप में हुई है। सभी कांगड़ा जिले के नगरोटा बागवां में एक गांव के निवासी हैं।

पुलिस उपाधीक्षक वीर बहादुर ने संवाददाताओं से कहा कि वाहन चालक का संभवत: वाहन से नियंत्रण उस समय छूट गया, जब वह सामने से आ रही एक बस को पास दे रहा था। जीप सड़क से फिसल गई और खाई में जा गिरी।

वीर बहादुर ने कहा कि अधिकांश घायलों को चंबा शहर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

70 फीसदी लोग मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने के पक्ष में

कुल 70 फीसदी भारतीय खासकर युवा वर्ष 2019 में नरेंद्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री चुनने के पक्ष में हैं, वहीं करीब 64 फीसदी महिलाएं इसकी पक्षधर हैं। शुक्रवार को जारी एक ऑनलाइन सर्वेक्षण में यह खुलासा हुआ है। यह सर्वेक्षण न्यूज एप इनशॉर्ट्स ने विपणन एजेंसी इपसॉस के सहयोग से किया। सर्वेक्षण के मुताबिक, नरेंद्र मोदी को दोबारा सत्ता में लाने के सवाल पर 63,141 उपयोगकर्ताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी। 70 फीसदी ने ‘हां’, 17 फीसदी ने ‘नहीं’ तथा 13 फीसदी ने ‘पता नहीं’ में जवाब दिया। यह सर्वेक्षण एप पर ही किया गया।

‘यूथ ऑफ द नेशन पोल’ के द्वितीय संस्करण के मुताबिक, 64 फीसदी महिलाओं ने मोदी को दोबारा सत्ता में लाने के लिए ‘हां’ में जवाब दिया, 18 फीसदी ने ‘नहीं’ तथा 18 फीसदी ने ‘पता नहीं’ में जवाब दिया।

यह सर्वेक्षण 25 जुलाई से 17 अगस्त के बीच किया गया। इसमें हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों की आयु 35 वर्ष से कम थी।

इनशॉर्ट्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) तथा सह-संस्थापक अजहर इकबाल ने कहा, “शासन, राजनीति, व्यापार, करियर व प्रौद्योगिकी, उद्देश्य पर युवा शहरी भारत का दृष्टिकोण पेश कर हम काफी प्रसन्न हैं।”

सर्वेक्षण में आधे से अधिक (57 फीसदी) प्रतिभागी देश के कुछ राज्यों में शराबबंदी के पक्ष में हैं।

यह पूछे जाने पर किक्या कॉलेज परिसर में छात्र राजनीति को बंद कर देना चाहिए, 61 फीसदी ने ‘हां’, 32 फीसदी ने ‘नहीं’ तथा सात फीसदी लोगों ने ‘कह नहीं सकते’ में जवाब दिया।

वहीं छात्रों में 54 फीसदी ने ‘हां’, 37 फीसदी ने ‘नहीं’ तथा नौ फीसदी ने ‘कह नहीं सकते’ में जवाब दिया।

यह पूछे जाने पर कि क्या बीते दो वर्षो में दलितों व अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार में इजाफा हुआ है, 33 फीसदी ने ‘हां’, 46 फीसदी ने ‘नहीं’ तथा 21 फीसदी ने ‘कह नहीं सकते’ में जवाब दिया।

इप्सोस इंडिया के सीईओ अमित आदरकर ने कहा कि जिस तरीके से युवा देश के विभिन्न मुद्दों पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं, उसमें पैनापन है।

आदरकर ने कहा, “चाहे जो हो आखिरकार ये युवा प्रौद्योगिकी संपन्न व विचार रखने वाले हैं तथा उनका विचार मायने रखता है।”

हिजबुल कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर में बिगड़े हालात से जिस तरह से केंद्र सरकार ने निपटा, उसपर 49 फीसदी प्रतिभागियों ने मुहर लगाई, जबकि 24 फीसदी ने इसपर सवाल उठाए।

कश्‍मीर में आतंक की आग भड़काने के लिए पाकिस्‍तान में चंदा जुटा रहा हाफिज सईद

भारत का सबसे बड़ा दुश्‍मन आतंकी भारत में आग लगाने के लिए चंदा जुटा रहा है। यह आतंकी और कोई नहीं बल्कि मुंबई हमले का मास्‍टर माइंड और लश्‍कर ए तैयबा चीफ हाफिज सईद है। यह चंदा वह कश्‍मीर में हिंसा जारी रखने वाले आतंकवादियों के लिए जुटा रहा है।

इंसानियत का यह दुश्‍मन पाकिस्‍तान में खुलेआम शिविर लगाकर भारत में आतंक फैलाने के नाम पर लोगों से भावुक अपील करके यह कार्य कर रहा है। वह लोगों से कश्‍मीर में जिहाद के लिए आर्थिक मदद करने का वास्‍ता दे रहा है।

आतंकी सरगना ने अपने इस चंदा वसूली अभियान का नाम तहरीक-ए-आजादी-ए-कश्मीर रखा है। हाफिज के संगठन जमात-उद-दावा की ओर से लगाए इन कैंपों में अंग्रेजी और उर्दू में लिखे बैनर टंगे हैं।

अंग्रेजी के बैनर में हाफिज के फोटो के साथ मोटे-मोटे अक्षरों में मूवमेंट फॉर कश्मीर लिबरेशन (एमकेएल) लिखा है। इसमें कहा गया है कि कश्मीर की आजादी के लिए लोग खुले दिल से आर्थिक मदद दें।

कैंप पाकिस्तान के कई शहरों में लगाए गए हैं। इस मुहिम में उसका दूसरा संगठन फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन भी पूरी ताकत से लगा है। उसने भी कश्मीरी स्ट्रगल फॉर फ्रीडम शीर्षक से पूरे पाकिस्तान में कैंप लगाए हैं।

इन शिविरों के बाहर लगे बैनरों में लिखा गया है कि एक कश्मीरी परिवार के राशन के लिए पांच हजार रुपये का दान करें। इसी प्रकार घायल कश्मीरियों के इलाज के लिए 20 हजार रुपये देने के लिए कहा गया है।

नाबालिग का अपहरण कर ले गए नेपाल, दरिंदे 23 दिनों तक करते रहे उसके साथ घिनौना काम

बिहार की एक नाबालिग लड़की का दो लोगों ने पहले अपहरण किया और उसे नेपाल ले गए। वहां उन दोनों ने दरिंदों ने उसके साथ 23 दिनों तक लगातार गैंगरेप किया। बिहार पुलिस ने सोमवार को दोनों आरोपियों को नेपाल पुलिस की मदद से गिरफ्तार कर लिया।

मामला बिहार के सुपौल का है। 4 अगस्त की शाम लड़की बाजार से घर जा रही थी। रास्ते में उसकी साइकिल खराब हो गई तो वो साइकिल लेकर पैदल ही जाने लगी।

बिहार की छात्रा के साथ नेपाल में गैंगरेप

इसी दौरान पीछे से आ रहे दोनों आरोपी लड़की को जबरन बाइक पर बैठाकर भाग गए। अपहरण के बाद आरोपी उसे सुपौल से नेपाल के इटहरी ले गए। वहां उसे 23 दिन तक एक रखकर गैंगरेप किया।

लड़की का अपहरण होने के बाद परिजनों ने केस दर्ज कराया था। सुपौल पुलिस को जांच के दौरान पता चला था कि दोनों आरोपी लड़की को लेकर नेपाल में रह रहे हैं। लड़की की बरामदगी के लिए सुपौल पुलिस ने नेपाल पुलिस से मदद मांगी।

गिरफ्तार दोनों आरोपियों की पहचान बलुआ थाना क्षेत्र के अरुण कुमार और वीरपुर थाना क्षेत्र के भवानीपुर निवासी संतोष कुमार राम के रूप में की गई है।

RSS ने बदली अपनी 90 साल पुरानी पहचान, अब नए ‘लुक’ में नजर आएंगे स्‍वयंसेवक

RSS स्‍वयंसेवक अब नए लुक यानी नई वेशभूषा में नजर आएंगे। राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के सदस्‍य अब हाफ पैंट की जगह फुलपैंट में नजर आएंगे।

सोमवार को दस हजार खाकी फुलपैंटों की पहली खेप संघ के नागपुर मुख्‍यालय में उसकी दुकान पर पहुंच गयी।

राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ ने करीब दस साल तक चली बहस और सर्वे के बाद गणवेश बदलने का फैसला इसी साल की शुरुआत में लिया था।

संघ के 12 सदस्यीय दल ने देशभर का दौरा करके सदस्‍यों से इस बारे में विचार भी जाने थे। अब खाकी फुलपैंट के साथ सफेद शर्ट, काली टोपी, ब्राउन मोजे और बांस की लाठी गणवेश में शामिल होगी।

RSS के स्‍वयंसेवक पहनेंगे अब फुल पैंट

पहले पैंट का रंग बदलकर ग्रे करने पर भी विचार किया गया था, लेकिन सहमति इस बात पर बनी कि वर्षों से संघ के साथ जुड़े खाकी रंग के राजनीतिक प्रतीक के कारण इसे नहीं छोड़ा जा सकता।

इससे पहले संघ ने 2011 में अपने गणवेश में लेदर बेल्ट की जगह मोटी कैनवास बेल्‍ट को शामिल किया था। शुरुआत में संघ के गणवेश में खाकी शर्ट और खाकी हाफपैंट शामिल थी, लेकिन 1940 में खाकी शर्ट की जगह सफेद शर्ट शामिल कर ली गई थी।

गौरतलब है कि आरएसएस सदस्य पिछले 90 सालों से खाकी हाफपैंट पहन रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार दशहरे पर 11 अक्टूबर को संघ के सदस्य हाफपैंट की जगह फुलपैंट अपना लेंगे।

कुख्यात अपराधी करतार सिंह बिहार में गिरफ्तार

बिहार के दरभंगा जिले के मब्बी क्षेत्र से पुलिस ने सोमवार को कुख्यात अपराधी करतार सिंह को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इसके पास से दो कार्बाइन सहित कई हथियार बरामद किए हैं। गिरफ्तार अपराधी जम्मू एवं कश्मीर का रहने वाला है। वह कई वर्षो से बिहार में रहकर आपराधिक घटनाओं को अंजाम देता था।

दरभंगा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) सत्यवीर सिंह ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर करतार सिंह को मब्बी क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि इसके पास से दो कार्बाइन, एक पिस्तौल, एक कट्टा तथा 175 गोलियां बरामद की गई हैं।

एसएसपी ने आगे बताया कि करतार दरभंगा में हाल के दिनों में हीरा पासवान की हत्या सहित करीब 15 से ज्यादा मामलों में आरोपी है। पिछले 30 वर्षो से दरभंगा तथा पास के जिलों में रहकर आपराधिक घटनाओं को अंजाम देता था।

उन्होंने बताया कि इसके खिलाफ समस्तीपुर, मधुबनी सहित कई जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में मुख्य रूप से हत्या के आरोप में मामले दर्ज हैं। पुलिस गिरफ्तार अपराधी से पूछताछ कर रही है।

भारत और म्यांमार के बीच हुए चार समझौते

भारत दौरे पर आए म्यांमार के राष्ट्रपति हतिन क्याव तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच यहां द्विपक्षीय बैठक के बाद भारत और म्यांमार ने सोमवार को चार समझौतों पर हस्ताक्षर किए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने ट्वीट किया, “म्यांमार के साथ संबंध आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति दोनों देशों के बीच हुए चार समझौतों के गवाह बने।”

पहले समझौते के तहत भारत, म्यांमार व थाईलैंड को जोड़ने वाले त्रिपक्षीय राजमार्ग के तामू-कालेवा खंड पर 69 पुलों का निर्माण होगा।

दूसरे समझौते के तहत, त्रिपक्षीय राजमार्ग के कालेवा-यार्गी खंड को उन्नत करना है।

तीसरा समझौता नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में हुआ है, जबकि चौथे समझौते के तहत पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग करना है।

इस साल मार्च में आंग सान सू की की लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) की सरकार के सत्ता में आने के बाद म्यांमार के राष्ट्रपति का यह पहला भारत दौरा है।

राष्ट्रपति क्याव चार दिवसीय भारत दौरे पर हैं। शनिवार को वह बिहार के बोधगया में थे। रविवार को वह ताजमहल देखने आगरा गए।

इससे पहले दिन में राष्ट्रपति क्याव का राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने माल्या की याचिका पर मांगा बैंकों से जवाब

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के नेतृत्व वाले बैंकों के संघ से कहा है कि शराब कारोबारी विजय माल्या की उस याचिका का जवाब दें जिसमें उन्होंने अवमानना की नोटिस को वापस लेने की मांग की है।

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बावजूद माल्या द्वारा अपनी और अपने परिवार की संपत्तियों का खुलासा नहीं करने की वजह से अवमानना याचिका दायर की गई है। न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ और न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन की खंडपीठ ने एसबीआई को 10 दिन का समय जवाब दाखिल करने के लिए दिया है।

अदालत ने माल्या को इस पर अपना प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया है। साथ ही मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 सितंबर 2016 की तारीख तय की है।

माल्या के वकील महेश अग्रवाल ने कहा कि शराब कारोबारी का तर्क है कि संपत्ति का खुलासा बैंकों की बकाया राशि के निपटान के लिए था। चूंकि किसी तरह का समझौता नहीं हो पा रहा है, ऐसे में उन्हें खुलासे के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और इस वजह से संपत्ति का खुलासा नहीं करने से अदालत की कोई अवमानना नहीं हुई है।

महान्यायवादी मुकुल रोहतगी ने शीर्ष अदालत से कहा कि आदेश को वापस लेने की माल्या की याचिका को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। वह (माल्या) अदालत के अवमानना नोटिस का जवाब देने के लिए खुद मौजूद होने में नाकाम रहे हैं। लेकिन, न्यायमूर्ति नरीमन ने रोहतगी को माल्या की अर्जी का जवाब देने के लिए कहा ताकि अवमानना के इस मामले में बहस पूरी हो।

POK को साथ लाने के लिए मोदी ने चली नई चाल, देंगे 2000 करोड़

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और गिलगित बल्तिस्तान क्षेत्र से विस्थापित लोगों की मदद के लिए आगे आए हैं| इनके लिए मोदी जल्द ही 2000 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा कर सकते हैं| जम्मू कश्मीर सरकार ने इस पैकेज से लाभान्वित होने वाले 36,348 परिवारों की पहचान कर ली है| हर परिवार को लगभग साढ़े पांच लाख रुपये मिलेंगे|

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक इसके लिए सरकारी स्तर पर सभी तैयारियां पूरी हो गई हैं| गृह मंत्रालय जल्द ही इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजने वाला है| पश्चिमी पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से विस्थापित लोग घाटी के जम्मू, कठुआ और राजौरी ज़िले के इलाकों में रह रहे हैं|

ये परिवार वर्ष 1947, 1965 और 1971 के युद्ध के दौरान विस्थापित हुए हैं| जम्मू-कश्मीर के संविधान के मुताबिक ये लोग यहाँ के स्थायी नागरिक नहीं है| केंद्र सरकार ने पिछले साल जनवरी में इन शरणार्थियों के लिए कुछ रियायतें देने की मंजूरी दी थी|

70 साल में भारत में पहली बार कोई मर्द बना है प्रधानमंत्री : बलूच नेता

बलूचिस्तान के एक टॉप नेता ने शनिवार को आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सुरक्षाबल बलूचिस्तान में 'मानवाधिकारों का भीषण उल्लंघन' कर रहे हैं। उन्होंने बलूच राष्ट्रवादी आंदोलन में भारत सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की मांग भी की है। 

'बलूच रिपब्लिकन पार्टी' के अध्यक्ष और बलूच राष्ट्रवादी नेता नवाब अकबर खान बुगती के पोते ब्रहुमदाग बुगती ने हाल में बलूचिस्तान में हालात का मुद्दा उठाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया अदा किया।

10 साल पहले पाकिस्तानी सेना के साथ एक मुठभेड़ में नवाब अकबर खान बुगती मारे गए थे। स्विटजरलैंड में रह रहे बुगती ने संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में बलूच लोगों के बीच जनमत संग्रह कराने की मांग करते हुए कहा, 'पाकिस्तान सुरक्षा बल मानवाधिकारों के बेइंतहा उल्लंघनों में शामिल रहे हैं। हम लोग किसी भी हाल में पाकिस्तान के साथ अब और नहीं रहना चाहते।'

अपने दादा को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम के संबंध में स्विट्जरलैंड गए बुगती ने फोन पर हुई बातचीत में अमेरिका, नेटो देशों, इजरायल और भारत सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अनुरोध किया कि वे उनकी लड़ाई में उनकी मदद करें।

उन्होंने कहा कि वह पाकिस्तान सरकार के साथ वार्ता के लिए तैयार हैं लेकिन उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आजादी के आंदोलन पर वह पीछे नहीं हटने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि फ्रांस के क्षेत्रफल के बराबर बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा सूबा है जिस पर पिछले सात दशक से पाकिस्तान का अवैध कब्जा है।

बुगती ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मोदी की हालिया टिप्पणी बीते सात दशक में 'सबसे प्रभावशाली बयान' है। बुगती ने कहा कि बलूचिस्तान की आजादी को लेकर वह आश्वस्त हैं। उन्होंने कहा, 'यह पहली बार है जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इस संबंध में बोला है। हमारा मानना है कि भारत को यह कदम बहुत पहले उठा लेना चाहिए था।'

बलूच लोगों के खिलाफ पाकिस्तान के अपराध को वैश्विक समुदाय के लिए चौंकाने वाला बताते हुए उन्होंने कहा, 'मैं प्रधानमंत्री मोदी का आभारी हूं। भारत के स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में बलूच लोगों की आवाज उठाने के लिए मैं प्रधानमंत्री मोदी का शुक्रिया अदा करता हूं।'

उन्होंने दावा किया कि बलूचिस्तान में हवाई बमबारी, गैसों का इस्तेमाल रोजाना की बात हो गई है और यह क्षेत्र गुमशुदा लोगों की वैश्विक राजधानी बन गया है।

बुगती ने कहा, 'हम राजनीतिक लोग हैं। हम इसे शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाना चाहते हैं। लेकिन, अब किसी भी हाल में हम पाकिस्तान का हिस्सा नहीं बने रहना चाहते। हम पाकिस्तान से आजादी चाहते हैं। हम इतने मूर्ख नहीं हैं जो बार-बार पाकिस्तान के साथ अपनी किस्मत आजमाएं। हमलोग शांतिपूर्ण तरीके से संवाद के लिए तैयार हैं।'


बलूच नेता ने कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय में जागरूकता फैलाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने बलूच स्वतंत्रता संघर्ष में सैन्य सहायता के लिए भी आह्वान किया। उन्होंने कहा, 'हमें अब तक भारत सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय के किसी देश से कोई सहयोग नहीं मिला है। हम भारत और अन्य देशों से बलूचिस्तान की मदद करने का अनुरोध करते हैं। पाकिस्तान में बलूच लोगों का नरसंहार जारी है।'

कश्मीर में जो मारे गए, वो दूध, टॉफी खरीदने नहीं निकले थे: महबूबा मुफ़्ती

जम्मू एवं कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने गुरुवार को सुरक्षा बलों द्वारा नागरिकों की हत्या को जायज करार देते हुए कहा कि जिन्हें गोली या पैलेट लगी, वे दूध या टॉफी खरीदने बाहर नहीं निकले थे। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए महबूबा को कुछ कठिन सवालों का सामना करना पड़ा। उनसे पूछा गया कि कैसे वे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ असंगत बल प्रयोग को उचित ठहरा सकती है, जबकि वे जब विपक्ष में थीं, तो साल 2010 में नागरिकों की मौत पर उन्होंने सरकार की आलोचना की थी।

इस पर मुख्यमंत्री ने क्रोधित होते हुए पत्रकार से कहा कि उन्हें दो घटनाओं की तुलना नहीं करनी चाहिए।

महबूबा ने कहा, “आप गलत है। 2010 में जो हुआ उसका एक कारण है। माछिल में एक नकली एनकाउंटर हुआ था। तीन नागरिक मारे गए थे। आज तीन आतंकवादी मारे गए हैं और उसके लिए सरकार को दोषी कैसे ठहराया जा सकता है?” उन्होंने कहा कि 8 जुलाई को हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी की हत्या के बाद लोग सड़कों पर बाहर क्यों निकले, जबकि सरकार ने कर्फ्यू लागू कर रखा था।

उन्होंने कहा, “क्या कोई बच्चा आर्मी कैंप से टॉफी खरीदने गया था? एक 15 साल का लड़का जिसने पुलिस थाने पर हमला किया (दक्षिण कश्मीर में), क्या वह दूघ खरीदने गया था? दोनों की तुलना ना करें।”

उन्होंने कहा कि गरीब कश्मीरी युवाओं को कुछ निहित स्वार्थो द्वारा ढाल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता ने कहा कि केवल पांच फीसदी कश्मीरी हैं, जो हिसा का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने कहा, “95 फीसदी लोग हिंसा नहीं चाहते। वे शांति चाहते हैं। वे कश्मीर मुद्दे के समाधान के लिए बातचीत चाहते हैं। हमें उन तक पहुंचना चाहिए।”

UN ने लगाई भारत के दावे पर मुहर, पाकिस्तान में ही डॉन दाऊद !

अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के पाकिस्तान में होने के सबूत भारत कई बार पेश कर चुका है। पाकिस्तान ये मानने को तैयार ही नहीं है कि दाऊद उसके यहां छुपा हुआ है। भारत ने दाऊद के ठिकानों की भी जानकारी दी है। ये भी बताया है कि वो किस घर में रहता है। लेकिन पाकिस्तान ने कभी नहीं माना कि डॉन दाऊद उसके यहां छुपा हुआ है।

पाकिस्तान भले ही न माने कि दाऊद उसके यहां है, लेकिन UN की एक समिति ने ये मान लिया है। दाऊद पाकिस्तान में ही है। संयुक्त राष्ट्र की समिति ने माना है कि भारत ने पाकिस्तान में दाऊद के जो 9 पते बताए हैं उनमें से 6 पके सही हैं। हालांकि संयुक्त राष्ट्र ने इस बात पर ज़्यादा ज़ोर दिया है कि दाऊद के भारत के बताये तीन ठिकाने सही नहीं हैं।

युनाइटेड नेशंस की अलकायदा प्रतिबंध समिति सूची से जो पते हटा रही है उनमें से एक UN में इस्लामाबाद की दूत मलीहा लोधी का घर भी है। इसके अलावा भारत के दिए गए बाकी के 6 पतों में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है। भारत ने एक डोजियर के जरिए पाकिस्तान में दाऊद के 9 पतों का जिक्र किया था। जिसमें कहा गया था कि दाऊद अक्सर इन पतों पर आता-जाता रहता है।

भारत ने जो पते दिए थे उनमें अंडरवर्ल्ड डॉन का कराची के नूराबाद इलाके का भी पता है जिसे हटाया नहीं गया है। इस डोजियर को पाकिस्तान के मुख्य सुरक्षा सलाहकार सरतात अजीज़ और भारतीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल की मुलाकात में दिया जाना था। हालांकि बाद में ये बैठक रद्द हो गई थी। डोजियर में एक पता उस मकान का भी है जो बिलावल भुट्टों के घर के पास था। संयुक्त राष्ट्र के इस इकरारनामे के बाद अब पाकिस्तान बेनकाब हो गया है। और साफ हो गया है आतंकियों और अंडरवर्ल्ड डॉन के लिए पाकिस्तान जन्नत है।

चीन और पाक की खैर नहीं, आ रहा है दुश्मनों का काल ‘Super Sukhoi’

भारत ने अपनी रक्षा प्रणाली को विकसित और मजबूत करने की दिशा में कदम आगे बढ़ा दिए हैं। भारत के पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान से बढ़ते खतरे को देखते हुए अब भारतीय सीमाओं की सुरक्षा को चाक चौबंद किया जा रहा है। भारत तेजी से रक्षा सौदे कर रहा है। इन सौदों में फ्रांस के साथ राफेल लड़ाकू विमान सौदा अंतिम स्तर पर है। लेकिन जरूरत को देखते हुए अब भारत ने अपने पुराने सहयोगी रूस के साथ अहम समझौता किया है।

दुश्मनों का काल कहा जाने वाला Super Sukhoi जल्दी ही भारतीय एयरफोर्स में शामिल होगा। भारत रुके हुए इस प्रोजेक्ट पर काम आगे बढ़ाने की तैयारी में है। रूस के सहयोग भारत जल्दी ही 5वीं जेनरेशन के लड़ाकू विमानों के लिए सुखोई को Super Sukhoi में बदलने के लिए समझौता करेगा। हालांकि भारत ने पहले ही फ्रांस के साथ 36 राफेल लड़ाकू विमानों का सौदा किया है, लेकिन रक्षा सूत्रों के मुताबिक वो काफी नहीं है।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक देश की सुरक्षा को अभेद बनाने के लिए 36 लड़ाकू विमान काफी नहीं है। फिलहाल के हालात पर नजर डालें तो अभी भारत के पास 33 लड़ाकू विमान हैं। इनमें से 11 विमान काफी पुराने हो चुके हैं। वहीं दूसरी तरफ मिग 21 और मिग 27 रिटायरमेंट की कगार पर हैं। इन्हे धीरे-धीरे वायुसेना से हटाया जा रहा है। मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से लगातार भारतीय वायुसेना को मजबूत बनाने की कोशिश चल रही है।

खास बात ये है कि रक्षा के क्षेत्र में भी मेक इन इंडिया को बढ़ावा दिया जाएगा। बताया जा रहा है कि चीन और पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारतीय वायुसेना को कम से कम 42 लड़ाकू विमानों की जरूरत है। देश में स्वदेसी तकनीस से भी विमान बनाए जा रहे हैं। तेजस के बाद अब दूसरे लड़ाकू विमानों को लॉन्च करने की तैयारी चल रही है। इसके अलावा अमेरिकी एफ-18 और एफ-16 के साथ ही स्वीडन के ग्रिपन ई को भारत में बनाने की तैयारी है. साफ है कि अब इन विमानों को मेक इन इंडिया टैग के साथ लॉन्च किया जाएगा।

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक भारत लड़ाकू विमानों की तकनीक और कीमत संबंधी मुद्दों से निपटने की तैयारी कर रहा है। इस काम में रूस भारत की मदद कर रहा है। आपको बता दें कि भारत और रूस के बीच सबसे पहले 2007 में लड़ाकू विमानों की शुरुआती डिजाइन के लिए 295 मिलियन डॉलर का सौदा हुआ था। हालांकि बाद में इसे 2010 के लिए बढ़ा दिया गया था।

सुखोई को Super Sukhoi में बदलने की कवायद शुरू हो गई है। जिसके तहत भारत अब फिफ्थ जनरेशन के फाइटर प्लेन बनाने की तैयारी कर रहा है। इस योजना के तहत भारत और रूस अगले 6 साल के लिए प्रोटोटाइप डेवलपमेंट, टेस्टिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए करीब 4 बिलियन डॉलर की डील करने जा रहे हैं। Super Sukhoi एक सिंगल सीट लड़ाकू विमान होगा। ऐसे 127 लड़ाकू विमान बनाने में करीब 25 बिलियन डॉलर का खर्च आएगा.

भारत के रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होने कहा कि भारत के लिए सुखोई की उपयोगिता काफी बढ़ गई है। पार्रिकर ने कहा कि हमारा लक्ष्य सुखोई की उपयोगिता को 75 फीसदी तक करना है। रक्षा मंत्री के मुताबिक सुखोई को बेहतर बनाने के लिए रूस, हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स और भारतीय वायुसेना मिलकर काम करेंगे. सभी मिलकर Super Sukhoi बनाएंगे.

आपको बता दें कि Super Sukhoi में एक्टि‍व इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे रडार और लॉन्ग रेंज स्टैंड ऑफ मिसाइल जैसी एडवांस तकनीक होगी। सुखोई एक घंटे में 2450 किमी तक पहुंच जाता है। एक बार उड़ान भरने के साथ वह आठ हजार किलो तक के हथियार लेकर 5200 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है। की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ये एक घंटे में 2450 किमी तक पहुंच जाता है। एक बार उड़ान भरने के बाद ये लड़ाकू विमान आठ हजार किलो तक के हथियार लेकर 5200 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है। जाहिर है कि सुपर सुखोई की खबर सुनकर चीन और पाकिस्तान का कांपना लाजमी है। इस विमान के आने के बाद भारतीय वायुसेना से मुकाबला करना किसी भी देश के लिए मुश्किल होगा।

सिंधु की भारतीयता में से दलित ढूंढने वाले आखिर कौन ?

जब पी.वी. सिंधु देश के लिए गोल्ड मैडल के लिए जिद्दोजहद कर रही थी तो देश में कुछ लोग उनकी ललक की सराहना करने या उनकी मेहनत से प्रेरणा लेने की बजाय सिंधु की जाति जानने में व्यस्त थे। आखिर वो कौन हैं जिनके लिए सिंधु की भारतीयता उनकी एक मात्र पहचान नहीं हैं। ये लोग क्यों देश को, समाज को तोड़ने वाली ताकतों को अपने हाथ में लिए हुए हैं। शिक्षा में आरक्षण होने के कारण टीना डाबी की जाति जानने वाले कुछ तर्क दे भी सकते हैं, परंतु खेल में, जिसमे आरक्षण का कोई लाभ नहीं हैं, उसमे जाति ढूँढना हमारे देश की एक नाकामी है। समय रहते अगर ये सोच न बदली जा सकी तो देश ऐसे ही खेलों में मैडल को तरसता रहेगा।

3 लाख से ज्यादा की नकद लेन-देन पर लग सकती है रोक

काले धन पर रोक लगाने के लिए सरकार विशेष जांच दल (एसआईटी) की 3 लाख से ऊपर के नकद लेन-देन पर रोक लगाने सिफारिश पर गौर कर रही है।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की चेयरपर्सन रानी सिंह नायर ने एसोसिएट चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) द्वारा मंगलवार को आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कर सम्मेलन में कहा कि सरकार अर्थव्यवस्था में काले धन पर लगाम लगाने के लिए तीन लाख रुपए से अधिक के नकद लेन-देन पर प्रतिबंध लगाने की एसआईटी की सिफारिश पर गौर कर रही है।

उन्होंने कहा कि आयकर विभाग पहले नकद लेन-देन पर एक प्रतिशत टीसीएस तथा पैन का उल्लेख करना अनिवार्य कर चुका है। एसआईटी की काला धन रोकने की सिफारिशों में इन पहलुओं का भी उल्लेख है।

उच्चतम न्यायालय द्वारा काले धन पर नियुक्त विशेष जांच दल (एसआईटी) ने तीन लाख रुपए और उससे अधिक के नकद लेन-देन पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है।

साथ ही व्यक्तियों और उद्योग के पास 15 लाख रुपए नकदी रखे जाने की सीमा तय किए जाने की भी सिफारिश की गई है।

एक गलती से नाराज अमेरिका ने पाकिस्तान को मदद की ‘बंद’

वाशिंगटन। सिर्फ एक गलती के कारण अमेरिका ने पाकिस्तान को सैन्य और आर्थिक मदद देनी करीब-करीब बंद कर दी है। साल 2011 से पाकिस्तान को अमेरिकी सुरक्षा मदद में 73 प्रतिशत की कमी आई है। यह जानकारी ‘कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस’ (सीआरएस) की रिपोर्ट से मिली है। पाकिस्तान के अंग्रेजी दैनिक ‘डॉन’ की वेबसाइट की मंगलवार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी कांग्रेस के लिए तैयार की गई रिपोर्ट में 2002 से 2015 के बीच पाकिस्तान को दी गई सैन्य और आर्थिक सहायता शामिल होने के साथ-साथ वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए भी राशि चिन्हित है।

एक गलती पड़ी भारी

इसमें बताया गया है कि साल 2011 से पाकिस्तान को अमेरिकी आर्थिक सहायता में 53 प्रतिशत की कमी हुई है। यह वह समय है जब एबटाबाद में अल कायदा नेता ओसामा बिन लादेन के बारे में पता चला था और सलाला में पाकिस्तानी सीमा चौकी पर अमेरिकी हवाई हमले के बाद दोनों देशों के बीच संबंध खराब होने शुरू हुए। अमेरिकी हमले में 24 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे।

आतंकी हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ पाकिस्तान द्वारा कार्रवाई नहीं करने की इच्छा के मद्देनजर पेंटागन ने इस माह के शुरू में पाकिस्तान को 30 करोड़ डॉलर की सैन्य मदद नहीं देने का फैसला किया। हालांकि, पाकिस्तान ने कार्रवाई नहीं करने के आरोप को तुरंत सिरे से खारिज किया था।

साल 2011 में पाकिस्तान को अमेरिकी सुरक्षा सहायता 1.3 अरब डॉलर थी जो गत साल घटकर 34.3 करोड़ डॉलर रह गई थी। आर्थिक सहायता की राशि जहां साल 2011 में 1.2 अरब डॉलर थी, वह गत साल घटकर 56.1 करोड़ डॉलर हो गई।

अमेरिकी पत्रिका ‘द वायर’ ने शनिवार को कहा कि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच मनमुटाव इस्लामाबाद को अपने सदाबहार मित्र चीन के और करीब ला सकता है।

‘द वायर’ ने टिप्पणी की है कि 30 करोड़ डॉलर की सैन्य सहायता के निलंबन को कभी बड़े सहयोगी रहे देश के साथ हाल में तनावपूर्ण संबंधों के संकेत के रूप में देखा गया है, जो भारत के लिए महत्वपूर्ण बात है।

30 करोड़ डॉलर का जो भुगतान रद्द कि या गया है, वह गठबंधन सहायता कोष (सीएसएफ) के रूप में था। इस कोष के तहत पाकिस्तान को साल 2002 से अब तक 14 अरब डॉलर मिल चुके हैं।

अमेरिका और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण संबंधों का एक और संकेत लड़ाकू विमानों का सौदा रद्द होना था। विदेशी वित्तपोषण कार्यक्रम के तहत अमेरिका को पाकिस्तान को 8 एफ-16 लड़ाकू विमान 27 करोड़ डॉलर में बेचने थे।

लेकिन, अमेरिकी कांग्रेस में प्रस्तावित बिक्री का विरोध हुआ और इस साल मई महीने में सौदा रद्द हो गया। विमान की पूरी कीमत 70 करोड़ डॉलर भुगतान कर पाकिस्तान अभी भी एफ-16 विमान खरीद सकता है। लेकिन, उसने इससे असमर्थता जताई है। इस एक गलती से भी अमेरिका नाराज हो गया था।

सबसे खतरनाक 5000 जवान पहुंच रहे हैं कश्‍मीर, सिखाएंगे सबक

आतंकी बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद कश्‍मीर के हालात पर काबू पाने के लिए अब बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) की मदद ली जाएगी। यहां 12 साल बाद कश्‍मीर में बीएसएफ के 2600 जवानों की तैनाती की गई है। अभी तीन हजार जवान और तैनात किए जाएंगे।

बीएसएफ का मुख्‍य काम एलओसी और अंतराष्‍ट्रीय सीमाओं की रक्षा करना है। इसकी कार्रवाई बेहद तेज होती है।

इस बारे में एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि बीएसएफ को लाल चौक पर तैनात किया जाएगा।

श्रीनगर के अन्य अहम इलाकों में भी विद्रोहियों को काबू करने में बीएसएफ मदद करेगी।

इससे पहले साल 1991 से 2004 तक आतंकवाद रोधी अभियान के तहत कश्‍मीर में बीएसएफ तैनात की गई थी।

स्थानीय लोगों के मन में बीएसएफ की छवि एक आक्रामक और क्रूर बल की है।

बीएसएफ की तैनाती गृहमंत्री राजनाथ सिंह के कश्‍मीर दौरे के ठीक एक दिन पहले हुई है।

बुधवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह दो दिन के लिए घाटी जाएंगे। राजनाथ सिंह वहां जाकर प्रशासनिक अधिकारियों और राजनेताओं से कश्‍मीर में उपजी हिंसा को लेकर बातचीत करेंगे।

दूसरी ओर, अलगाववादियों ने घाटी में अपने विरोध प्रदर्शन और बंद को 25 अगस्त तक बढ़ा दिया है।

इलाके के सभी स्कूल-कॉलेज, बाजार, सार्वजनिक परिवहन और दूसरे व्यापार बंद हैं।

बता दें कि कश्‍मीर हिंसा में अब तक 70 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि करीब सवा महीने से कई इलाकों में कर्फ्यू जारी है।

गाय के चमड़े से बने बैग के संदेह में ‘गौ रक्षकों’ का शिकार हुआ लड़का, ब्राह्मण होने के कारण बचा!

मेरा नाम पूछा गया और कश्यप सुन कर शायद उन्होंने मुझे ब्राह्मण समझा क्योंकि उनकी मराठी में हो रही बातचीत के दौरान मैं केवल ‘ब्राह्मण’ शब्द ही समझ पाया। फिर वह चले गए।

चमड़े का एक थैला लेकर ऑटो से जा रहे 24 साल के एक व्यक्ति को उस समय परेशानी का सामना करना पड़ा जब ऑटो के चालक को संदेह हुआ कि इस व्यक्ति का थैला गाय के चमड़े से बना हुआ है। यह घटना शुक्रवार को अंधेरी उपनगर में हुई। वरूण कश्यप नामक यह व्यक्ति ऑटो रिक्शा से अपने कार्यालय जा रहा था। उसके ड्राइवर को संदेह हुआ कि उसका थैला गाय के चमड़े से बना है।

एक निजी कंपनी में क्रिएटिव निदेशक के पद पर कार्यरत कश्यप ने अपने फेसबुक पोस्ट पर बताया, ‘‘मैं आटो से काम पर जा रहा था। मेरे लंबे बालों और नाक में छेद देख कर ऑटो वाले को शुरू से ही मुझ पर संदेह हुआ और वह मुझे पूछताछ करने लगा। फिर उसने ट्रैफिक सिग्नल पर ऑटो रोका और मेरे चमड़े के थैले को देखने लगा।’’

असम निवासी कश्यप ने बताया कि फिर चालक ने उनका थैला छुआ और कहा कि यह गाय के चमड़े से बना है। कश्यप ने इससे इंकार किया और बताया कि यह थैला ऊंट के चमड़े बना है और उन्होंने इसे पुष्कर से खरीदा है। लेकिन जवाब से असंतुष्ट चालक ने कार्यालय जाने के रास्ते में पड़ने वाले एक मंदिर पर गाड़ी रोक दी। कश्यप के अनुसार ‘‘इससे पहले कि मैं कुछ कर पाता, चालक ने मंदिर के सामने धूम्रपान कर रहे तीन लोगों को इशारे से बुलाया। उनके आने पर सबने मराठी में बात की जो मैं नहीं समझ पाया। उन्होंने मुझे ऑटो से उतरने को कहा। मैंने मना किया। तभी उनमें से एक व्यक्ति ने मेरे थैले की जांच की। मेरा नाम पूछा गया और कश्यप सुन कर शायद उन्होंने मुझे ब्राह्मण समझा क्योंकि उनकी मराठी में हो रही बातचीत के दौरान मैं केवल ‘ब्राह्मण’ शब्द ही समझ पाया। फिर वह चले गए।’’

उन्होंने बताया कि अगले यातायात सिग्नल पर वह ऑटो से उतर गए, उसका नंबर नोट किया और ऑटो चालक का फोन नंबर मांगा। चालक ने नंबर देते हुए गर्व से कहा ‘‘आज तो बच गए।’’ कश्यप के मुताबिक, उन्होंने कल डी एन नगर पुलिस थाने में संदिग्ध गौरक्षकों :चालक और उसके तीन साथियों: के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। एक पुलिस अधिकारी ने बताया ‘‘शिकायतकर्ता को कोई शारीरिक नुकसान नहीं हुआ है इसलिए हमने गैर संज्ञेय अपराध दर्ज किया है। मामले की जांच की जा रही है।’’

इंसानों से मिलने छत्तीसगढ़ में आए एलियन

वैज्ञानिकों की लाख कोशिशों के बावजूद आज भी एलियन इंसानों के लिए गूढ़ रहस्य बना हुआ है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि छत्तीसगढ़ के सिरपुर में हजारों साल पहले एलियन आते थे। पुरातात्विक खुदाई में कुछ ऐसे ही प्रमाण मिले हैं, जिनसे यह पुख्ता होता है कि यहाँ हजारों साल पहले एलियन आ चुके हैं।

एलियन इंसानों के लिए गूढ़ रहस्य

वरिष्ठ पुरातत्वविद डॉ. अरुण शर्मा के मुताबिक एलियन को सिर्फ कोरी कल्पना मानना गलत होगा, क्योंकि समय-समय पर इस बात के प्रमाण मिलते रहे हैं कि दूसरे ग्रह के प्राणी वास्तंव में अस्तित्व में होते हैं।

उन्होंने बताया कि सिरपुर उत्खनन में बाजार क्षेत्र से करीब 2600 वर्ष पुरानी पकाई हुई मिट्टी के पुतले मिले हैं, जिन्हें सामान्य खिलौने नहीं कहा जा सकता।

इनमें कुछ ऐसे भी हैं, जो पाश्चात्य देशों में मिले एलियन के नाम से विख्यात मूर्तियों के ही समान हैं। कुछ में तो एलियन के चेहरों और मास्क में इतनी समानता है कि इन्हें आज से 2600 वर्ष पहले सिरपुर के कलाकारों ने बनाया, जबकि उनका विदेशों से कोई संबंध ही नहीं था।

डॉ. शर्मा के मुताबिक जब कुछ पाश्चात्य वैज्ञानिक सिरपुर आए, तब उन्हें इन मूर्तियों को दिखाया गया तो वे भी उनकी कल्पना एवं सिरपुर के कारीगर की कल्पना में समानता से आश्चर्यचकित हो गए।

सिरपुर के पुरातात्विक उत्खनन का कार्य डॉ. अरुण शर्मा के नेतृत्व में ही 2008-09 के आसपास की गई थी, जिनमें प्राचीन सभ्यता और संस्कृति के प्रमाण मिले हैं।

सिरपुर के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के प्रयागराज राजिम के उत्खनन का जिम्मा भी डॉ. अरुण शर्मा ने संभाला था। डॉ. शर्मा ने दूसरे ग्रहों के प्राणी के संबंध में आश्चर्य व्यैक्त0 करते हुए कहा कि राजिम के उत्खनन में भी बिल्कुकल ऐसी ही मूर्तियां मिली हैं।

उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ में पुरावैभव का भंडार है और इस बात की जरूरत है कि इस विषय पर और अधिक खोज की जाए और खासकर छत्तीसगढ़ के दो-तीन ऐतिहासिक पुरास्थलों में खुदाई की जाए, ताकि छत्तीसगढ़ का पुरावैभव प्रकाश में आ सके।

डॉ. शर्मा का कहना है कि जब तक बनाने वाले इन एलियन को नहीं देखा होगा, तब तक ऐसी सौ प्रतिशत समानता नहीं आ सकती। इससे साफ जाहिर है कि सिरपुर जैसे संपन्न एवं विकसित वाणिज्यिक इलाके में दूसरे ग्रहों के ये प्राणी आए होंगे।

7 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

रायपुर। नक्सल रोधी अभियान के बढ़ते दबाव व शासन की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर लगातार नक्सली लीडर, सदस्यों, सहयोगियों के आत्मसमर्पण से प्रेरित होकर रविवार को सात नक्सलियों ने समाज की मुख्यधारा में सम्मिलित होने के लिए नारायणपुर पुलिस के समक्ष एक भरमार बंदूक समेत आत्मसमर्पण कर दिया।

नक्सल रोधी अभियान

बस्तर आईजी एसआरपी कल्लूरी ने बताया कि नक्सली सदस्य लखमू गावड़े (जनताना सरकार अध्यक्ष), मंगलू गोंड (सीएनम अध्यक्ष), संतोष दुग्गा, (जनताना सरकार सदस्य), राजू राम कावड़े (जनताना सरकार सदस्य), घसिया गोंड (मिलिशिया सदस्य), साधूराम कावड़े (जनताना सरकार सदस्य) एवं पंडरू गोंड (जनताना सीएनएम सदस्य) थाना आमाबेड़ा में पिछले छह-सात वर्षो से नक्सली संगठन के लिए कार्य कर रहे थे।

सभी नक्सली कमांडर मार्ग अवरूद्ध करने, तोड़फोड़, आगजनी, पोस्टर, पांपलेट फेंकने जैसी घटनाओं में शामिल रहे हैं।

उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पित नक्सली मंगलू गोंड के ऊपर शासन द्वारा एक लाख रुपये का इनाम घोषित है। आत्मसमर्पित नक्सली सदस्यों को शासन की ‘पुनर्वास नीति’ के तहत पुनर्वास योजना का लाभ दिया जाएगा।