
भारत और पाकिस्तान के संबंधों में कश्मीर का मुद्दा हमेशा से अहम रहा है। कश्मीर को लेकर पाकिस्तान भारत पर बेबुनियाद आरोप लगाता रहता है। लेकिन केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद से पाकिस्तान में एक डर का माहौल देखा जा रहा है। ये डर Balochistan को लेकर है। क्या इस डर का कारण ये है कि बलूचिस्तान धीरे-धीरे पाकिस्तान के हाथों से फिसल रहा है।
हाल के दिनों में जिस तरह से Balochistan में पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन देखे गए हैं उस से इस खबर को बल मिलता है। बलूचिस्तान में पाकिस्तान के विरोध का ये आलम है कि भारत-पाक मैच में पाकिस्तान की हार पर यहां जश्न मनाया जाता है। सोशल मीडिया पर टीम इंडिया को बधाई संदेश भेजे जाते हैं। बलूचिस्तान के लोग पाकिस्तान से आजादी के लिए संघर्ष भी कर रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक Balochistan में पाकिस्तान पिछले 60 सालों से अत्याचार कर रहा है। एक मोटे अनुमान के मुताबिक साल 2000 से अब तक करीब 20 हजार बलूच लोगों की पाक सेना ने हत्या की है। इनमें करीब 5 हजार बच्चे भी शामिल है। एक तरह से पाक सेना दमन के दम पर बलूच लोगों की आजादी के सपने को कुचल रही है। जबकि बलूचिस्तान के लोग चाहते हैं कि भारत का मीडिया इन अत्याचारों को पूरी दुनिया में दिखाए।
Balochistan की आजादी के समर्थक भारत सरकार से भी मदद चाहते हैं। यहीं से शुरू होता है बलूचिस्तान का भारत के लिए महत्व। बलूचिस्तान में चीन का दखल बढ़ता जा रहा है। चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए पाकिस्तान चीन को बलूचिस्तान में करीब 2 हजार एकड़ जमीन देगा। आपको बता दें कि बलूचिस्तान प्राकृतिक रूप से काफी संपन्न हैं। गैस और तेल के यहां अकूत भंडार हैं।
अब चीन की रणनीति समझते हैं। चीन बलूचिस्तान के जरिए अरब सागर पर पहुंच बनाना चाहता है। चीन ग्वादर पोर्ट के जरिए इस क्षेत्र में भारत के प्रभाव को कम करना चाहता है। ग्वादर पोर्ट चीन का एक बड़ा रणनीतिक कदम है। चीन यहां एक नेवी बेस बनाने जा रहा है। पाकिस्तान भी चीन की मौजूदगी चाहता है ताकि भारत की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। इस से साफ हो जाता है कि Balochistan की अहमियत भारत के लिए कितनी ज्यादा है।
Balochistan में पाकिस्तान से आजादी का आंदोलन चल रहा है। पाकिस्तान के खिलाफ यहां के लोगों में काफी गुस्सा है। वहीं चीन के बढ़ते दखल से बलूच लोग नाराज हैं। वो समझ रहे हैं कि चीन के जरिए पाकिस्तान संसाधनों का दोहन करना चाह रहा है। इसी से परेशान हो कर वो भारत की मदद मांग रहे हैं। पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में चीनियों की सुरक्षा कड़ी कर रखी है.
भारत कई बार Balochistan के मुद्दे को उठा चुका है। एक तरह से कश्मीर मुद्दे का तोड़ भारत को बलूचिस्तान के रूप में मिला है। कुछ दिन पहले मीडिया में बलूचिस्तान में पाक सेना के अत्याचार की तस्वीरें वायरल हुई थीं। उसके बाद से पाकिस्तान की चिंता बढ़ गई है। पाकिस्तान जानता है कि घरेलू फ्रंट पर अगर भारत ने दखल देना शुरू किया तो वो बेनकाब हो जाएगा।
पाकिस्तान के लिए भारत की तरफ से सबसे बड़ी परेशानी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल हैं। डोवाल को पाकिस्तान में खलनायक की तरह देखा जाता है। पाक मीडिया में भी डोवाल को लेकर चर्चा होती रहती है। दरअसल 2014 में डोवाल ने एक बयान दिया था। उन्होने कहा था कि अगर पाकिस्तान मुंबई हमले जैसा कोई दूसरी हरकत करता है तो उसे Balochistan से हाथ धोना पड़ेगा। इस एक बयान का ये असर है कि पाकिस्तान ने चीन की मदद से बलूचिस्तान की किलेबंदी करने की योजना बना ली। फिलहाल बलूचिस्तान को लेकर पाकिस्तान का डर बेवजह नहीं है।