
भारतीय रेलवे लगातार अपने ढांचे को बदलने में लगा है। पीएम मोदी और रेल मंत्री सुरेश प्रभु देशवासियों को वर्ल्ड क्लास की रेलवे सुविधाएं देने पर अमादा है। इसी क्रम में रेलवे ने एक और कदम बढ़ाया है। रेलवे बहुत जल्द डीजल इंजन वाली रेलगाडि़यों को हटाने का प्लान तैयार कर रहा है। इनकी जगह भारतीय रेलवे तेज रफ्तार से चलने वाली इलैक्ट्रॉनिक ट्रेनों को पटरियों पर उतारने जा रही है और यह सब होगा मिशन रफ्तार के तहत।
मिशन रफ्तार में रफ्तार बढ़ाना है उद्देश्य
रेलवे मिशन रफ्तार के तहत इंजन वाली रेलगाडि़यों को हटाने और तेज रफ्तार वाली रेलगाडि़यों को लाने जा रहा है। इसके लिए पहल भी शुरू कर दी गई है और छोटे रूटों पर डीजल इंजनों की जगह इलैक्ट्रिक एमईएमयू ट्रेन उतारनी शुरू कर दी हैं। इसका उद्देश्य ट्रेनों की रफ्तार 25 किलोमीटर प्रति घंटा बढ़ाने और डीजल से फैल रहे प्रदूषण को कम करना है। रेलवे के अधिकारियों ने कहा कि इलैक्ट्रिक इंजन का इस्तेमाल करने से ईंधन पर होने वाले खर्च पर कटौती होगी क्योंकि बिजली सस्ती पड़ती है।
मिशन रफ्तार
ये पहल ‘मिशन रफ्तार’ का हिस्सा है, जिसका ऐलान रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने इस साल रेल बजट में किया था। इस मिशन के तहत अगले पांच साल में माल गाड़ियों की औसत रफ्तार को दोगुना करना और नॉन-सबअर्बन ट्रेनों की रफ्तार 25 किलोमीटर प्रतिघंटा करना है। फिलहाल नॉन-सबअर्बन ट्रेनों की औसत रफ्तार 46.3 किलोमीटर प्रति घंटा जबकि माल गाड़ियों की रफ्तार 24.2 किलोमीटर प्रति घंटा है।