नवाज शरीफ को बड़ा झटका : PoKमें लगे आजादी के नारे, पाक मीडिया का विरोध

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थानीय लोग 21 जुलाई को हुए चुनाव में  धांधली और इस क्षेत्र में पाकिस्तान के कब्जे के विरोध में सड़कों पर उतर रहे हैं, उधर एशियन ह्यूमन राइट कमिशन की जारी ताज़ा रिपोर्ट ने एक बार फिर POK के गिलगिट बाल्टिस्‍तान क्षेत्र में पाकिस्‍तानी पुलिस की ओर से किए जा रहे अत्‍याचार की पोल खोली है। ये दोनों ही नवाज शरीफ के लिए खतरे की घंटी है ।

आंदोलनरत लोग तथाकथित चुनाव पर भारी विरोध जता रहे हैं और आजादी के नारे लगा रहे हैं। प्रदर्शनकारी पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद, गुंडागर्दी के खिलाफ भी अपनी आवाज उठा रहे हैं। पीड़ित लोगों ने पाकिस्तानी मीडिया के खिलाफ भी नारे लगाए।

21 जुलाई को हुए चुनाव नतीजे जिसमें 41 में से 32 सीटें नवाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज को मिली थीं उसके बाद से ही PoK उबल रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चुनाव हमेशा सत्तारूढ़ पार्टी के पक्ष में फिक्स रहते हैं।

पिछले साल रिपोर्टों में ये सामने आया था कि PoK के निवासी खुले तौर पर भारत का एक हिस्सा बनने के लिए वकालत कर रहे थे। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शासन की शैली से प्रभावित हैं।

उधर एशियन ह्यूमन राइट कमिशन की जारी ताज़ा रिपोर्ट ने एक बार फिर POK के गिलगिट बाल्टिस्‍तान क्षेत्र में पाकिस्‍तानी पुलिस की ओर से किए जा रहे अत्‍याचार की पोल खोली है।

जारी रिपोर्ट में पीओके में पाक पुलिस की बर्बरता और जुल्‍म की तस्‍वीर सामने आई है और कमिशन ने अब इन पाकिस्‍तानी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

एशियन ह्यूमन राइट कमिशन ने पाक पुलिस के अत्याचारों के तस्‍वीरें भी जारी की है। पीओके के गिलगिट बाल्टिस्‍तान इलाके के चलत बाला जिला में पुलिस ने एक बेकसूर व्‍यक्ति की सिर्फ इसलिए पिटाई कर दी कि उसने स्थानीय पंचायत के भेदभाव पूर्ण फैसले को मानने से इनकार कर दिया। शब्बीर हुसैन नामक शख्स को बिना FIR, बिना वारंट के पुलिस थाने ले आई और उसकी इतनी बेरहमी से पिटाई की कि उसके शरीर पर गहरे दाग पड़ गये। कमिशन की रिपोर्ट में कहा गया है कि अभियोजन का काम भी वहां पुलिस ही नियंत्रित करती है, इसलिए वह किसी पर भी जुल्म करने के लिए आजाद है।

एशियन ह्यूमन राइट कमिशन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि स्थानीय अखबारों में वहां की पुलिस की हैवानियत की कहानियां छापी है। कमिशन ने यह भी कहा है कि पुलिस वहां के ग्रामीण व शहरी इलाकों में लोगों का उत्पीड़न करती है और उनसे अवैध वसूली करती है। बताया गया है कि शब्बीन हुसैन का अपने चचेरे भाई से घर-जमीन को लेकर विवाद था। इस मामले में पंचायत ने जो फैसला सुनाया उसके अनुसार, शब्बीर को अपने घर में बड़े बदलाव करने पड़ते, जिससे उसे दिक्कत होती। इसलिए उसने उस भेदभाव पूर्ण फैसले को नहीं माना। इस पर थाने में उसकी शिकायत की गयी। पुलिस ने बिना कोई एफआईआर लिखे या बिना वारंट के 26 जून को उसके घर पर छापा मारा और उसे उठा ले गई। थाने में उसे अवैध तरीके से रोका गया और बेरहमी से पिटाई की।