सर मेरे पास एक ही जोड़ी जूते हैं!

स्थान : सोनीपत
दिनाँक : 2nd अगस्त
समय : शाम का साढ़े चार

ये हैं जनाब राकेश कुमार जी, जो हरियाणा के सोनीपत जिले में कार्यरत हैं,लग रहा है ये भी बारिश का आनंद ले रहे पर सत्यता कुछ और है,
मूसलाधार बारिश में जहाँ लोग घर में बैठकर चाय की चुस्की के साथ टीवी पर मनोरंजन कर रहे थे, ये बीच सड़क पर नंगे पैर खड़े होकर यातायात व्यवस्था देख रहे थे, पर ताज़्ज़ुब कि नंगे पैर क्यों खड़े हैं तो पूछने पर जवाब मिला की *सर मेरे पास एक ही जोड़ी जूते हैं अगर वो भीग जायेंगे तो कल ड्यूटी पर क्या पहनकर आऊंगा* आँखे रुंध जाती हैं ऐसी बाते सुनकर, यह भी एक शादीशुदा सामाजिक प्राणी है, इसके भी बीवी बच्चे हैं इसे भी तबियत ख़राब का दर होता है कि छुट्टी कि वजह से पैसे न काट जाएँ.

किसी सिपाही की वर्दी उतरवा कर देखिये अधिकांश के बनियान में छेद और मौजे फटे हुए निकलेंगे , मानसिक तौर पर पूछिये तो अधिकांश कहेंगे बीबी बच्चे है परिवार पालना है तो नौकरी कर रहे हैं कोई दूसरा ऑप्शन होता तो कब के छोड़ चुके होते, दिन रात गालियाँ सुनकर घृणा सी हो गयी है अपने आप से

सुनने में तो यह बड़ी साधारण सी घटना है पर इसके पीछे एक दर्द और एक देशभक्त सिपाही की कहानी छिपी है, हमारी सरकार को कम से कम छाते तो उपलब्ध कराने चाहिए, जिससे कुछ सुविधा तो मिले। जनता भी इन पुलिस वालो के प्रति संवेदनशील नहीं है कुछ ही लोग देखे हैं जो पुलिस वाले को अच्छा समझते हैं, वरना अधिकतर तो ये सोचते हैं की कब इसकी नींद लगे और में फोटो ले लूँ, कब वह अपनी जगह से हिले और मैं एक न्यूज़ तैयार कर लूँ । मानवता के नाते कम से कम अच्छे लोगो की कहानी ज़रूर शेयर करे जिससे अन्य लोगो को भी प्रेरणा मिले और शायद उनमे भी देशभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा कि भावना जाग जाये।