
जम्मू-कश्मीर में पकड़े गए पाकिस्तानी आतंकी बहादुर अली के खुलासे और कबूलनामे के बाद अब भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को घेरने की तैयारी में है.
भारतीय विदेश मंत्रालय ठोस सबूतों वाला डोजियर पाकिस्तान को सौंपने वाला है और इसकी जोरशोर से तैयार शुरू हो गई है.
आपको बता दें कि बहादुर अली ने NIA को बताया कि पाकिस्तानी सेना ने उसे ट्रेनिंग दी और उसे बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद कश्मीर में आग भड़काने के लिए भेजा गया था.
पीएमओ ने एनआईए से अब तक की जांच और उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी ली. एनआईए ने गृह मंत्रालय के जरिए रिपोर्ट भेजी. एनआईए ने आतंकी से बरामद वायरलैस सैट आईकोम कंपनी से संपर्क किया है, ताकि ये पता लगाया जा सके कि वायरलैस कहां किसे बेचे गए थे और कितने में बेचे गए थे. एनआईए का कहना है कि आईकोम कंपनी सहयोग कर रही है.
एनआईए ने बहादुर अली से पाकिस्तान के संगठन फलाह-ए-इंसानियत फाउडेंशन की पूरी जानकारी ली. ये संगठन लश्कर का फ्रंट एनजीओ है. इस संगठन में बहादुर अली काम कर चुका है.
एके 47 रायफलों के नंबर के आधार हथियार कंपनी से संपर्क किया गया है. ताकि जाना जा सके कि कहां और किसे बेची गई थी रायफलें.
ये भी बाताया जा रहा है कि पीएम मोदी शुक्रवार को सर्वदलीय बैठक में अब तक की जांच और उठाए गए कदमों के आधार पर पाकिस्तान की भूमिका की विस्तृत जानकारी देंगे.
बहादुर अली के कबूलनामे
मेरा नाम बहादुर अली है. मेरे अब्बू का नाम मोहम्मद अली है. मैं पाकिस्तान के पंजाब लाहौर का रहने वाला हूं. 2009 के जमात उद दावा के कैंप में गया था वहां जमात उद दावा के रहमान और बिलाल थे. उन्होंने मुझे वीडियो दिखाया कि कैसे भारत की फौज ने मुस्लिम पर जुल्म किए. उन्होंने मुझे बताया कि जेहाद बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि वक्त आ गया है कि हिंदुस्तान जाकर जेहाद करना है और इस्लामी हुकूमत लानी है. बिलाल और अब्दुल्ला ने मुझे कहा कि जमात उद दावा की तरफ से मुझे जेहाद के लिए जाना है इसके बाद मैं हाफिज सईद से भी मिला. जमात उद दावा के बिलाल और अब्दुल रहीम ने मुझे जेहाद के लिए तैयार किया. इसके बाद मैं लश्कर ए तैयबा के कैंप में जेहाद की ट्रेनिंग लेने गया.
मैंने पहली ट्रेनिंग 2012 में ली. इस ट्रेनिंग में 50-60 लड़के शामिल थे. दूसरी ट्रेनिंग 2014 में मुजफ्फराबाद में हुई. इसके बाद मैंने जमात उद दावा के संगठन में काम भी किया. मैंने तीन महीने तक इस संगठन में काम किया और मुझे दस हजार रुपये की तनख्वाह मिलती थी. इसका दफ्तर लाहौर के लिबर्टी चौक पर था. इसके बाद लश्कर का कमांडर जिसका नाम अबू कासिम था उसको जम्मू कश्मीर में भारतीय फौज ने मार दिया. पिंड में उसके गांव में हाफिज सईद ने उसके जनाजे की नमाज पढ़ाई. मैं भी अपने तीन साथियों के साथ इसमें शरीक हुआ था. 2014 में गर्मी में लश्कर ए तैयबा की हरकत में तेजी आई. उन्होंने लड़कों को कहा कि अब जेहाद करना है और फिर से ट्रेनिंग दी गई.
मैं अप्रैल 2016 में ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान गया था . हम 20 से 25 लड़के थे. इस ट्रेनिंग कैंप का बेस मुजफ्फराबाद में है. जो ट्रेनिंग दे रहा था उसका नाम अबू फजे है. हमें वहां AK 47, पिस्तौल, GPS के नक्शे की ट्रेनिंग दी गई. ट्रेनिंग में हमें बताया गया कि जो पठान होते हैं उसको जेहाद के लिए अफगानिस्तान भेजा जाएगा और हमें जेहाद के लिए भारत भेजा जाएगा. इसके बाद हमें दूसरे कैंप में ले जाया गया जहां हमें गूगल मैप की ट्रेनिंग दी गई. हमें गूगल मैप के जरिये जाने का रास्ता बताया गया. अगले दिन हमें AK 47, 5 मैगजीन, 2 ग्रेनेड 5 शेल दिए गए.
हमें GPS के पास बक्सा और वायरलेस सेट भी दिया था . सामान देने के बाद रात 10 बजे हमें बॉर्डर पर ले जाया गया. हमने दो तीन रात सफर किया अबू हैदर वायरलेस पर हमारे संपर्क में था. बॉर्डर के पास पहुंचकर मैंने उससे पूछा कि अगर भारत की फौज ने हमपर फायर कर दिया तो क्या करेंगे ? उसने कहा कि वो पाकिस्तान फौज भारत की फौज पर नजर रखेगी. अगर तुम पर फायरिंग हुई तो पाकिस्तानी फौज कवर फायर देकर हमें बॉर्डर पार करा देगी.
अबू हैदर ने हमें बॉर्डर क्रॉस कराया. हम तीन लड़कों ने बॉर्डर क्रॉस किया था. भारत में दाखिल होकर हमने अबू हैदर को बताया कि हम पहुंच गए हैं. हमने लश्कर के लोगों से संपर्क किया. हमें बताया कि हमसे पहले भेजे गए लड़के पूरे भारत में फैल गए हैं और हम बहुत अच्छा काम कर रहे हैं. एक दिन गांव में जब मैं खाना लेने गया था तो वहां फायरिंग हो गई. मैं जंगल में भागा था और पाकिस्तान के अपने ट्रेनिंग कैंप से संपर्क किया और बताया कि मेरे दो साथी बिछड़ गए हैं. उन्होंने कहा कि परेशान न हो और लोग भेजेंगे और तुम्हें काम बताएंगे. उन्होंने ये भी बताया कि हमारा एक भाई बुरहान वानी श्रीनगर में मारा गया . उसकी मौत की वजह से कश्मीर के हालात खराब हो गए हैं.
जो तेरे पास ग्रेनेड है उसे लेकर जलसे जुलूस में शामिल हो जाओ. मैंने पूछा कि क्या करना है ? उन्होंने कहा कि भारतीय फौज पर ग्रेनेड फेंकना है. इससे माहौल और खराब होगा दंगे फसाद होंगे मैंने दो तीन बार कोशिश कि लेकिन कामयाब नहीं हुआ अचानक एक दिन पुलिसवाले ने मुझे पकड़ लिया और तलाशी ली मेरे पास वायरलेस सेट GPS था मैंने पूछताछ में बताया कि मैं लश्कर का आदमी हूं और पाकिस्तानी हूं.