
क्या सलमान ख़ुर्शीद बताएंगे कि बलूचिस्तान में मानवाधिकार हनन का मुद्दा उठाने से भारत का पीओके पर दावा कैसे कमज़ोर हो जाता है?
New Delhi, Aug 17 : सलमान खुर्शीद ने पिछले साल नवंबर में पाकिस्तान जाकर भारत विरोधी बयान दिया था। कहा था कि “भारत ने पाकिस्तान के अमन के पैगाम का उचित जवाब नहीं दिया। मोदी अभी नए हैं और स्टैट्समैन कैसे बना जाता है, यह उन्हें सीखना है।“ यानी मोदी से अदावत की आड़ में सलमान ख़ुर्शीद ने अपने वतन भारत को ही अमन का दुश्मन और गुनहगार बना डाला।
और ज़रा यह भी याद कर लीजिए कि भारत ने पाकिस्तान के अमन के पैगाम का क्या उचित जवाब नहीं दिया था। दरअसल शंघाई सहयोग संगठन के सम्मेलन के दौरान ऊफा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ ने एक समझौते पर हस्ताक्षर करके आतंकवाद से लड़ने की प्रतिबद्धता जताई थी। इसके बाद 23 अगस्त 2015 को दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की मुलाकात तय की गई।
लेकिन इस मुलाकात से ठीक पहले पाकिस्तान आतंकवाद पर बातचीत से मुकर गया और कश्मीर मामले को लेकर पैंतरेबाज़ी करने लगा, जिसमें हुर्रियत नेताओँ से मुलाकात की शर्त भी शामिल थी। भारत सरकार ने इसपर कहा कि चूंकि बातचीत आतंकवाद पर है और भारत एवं पाकिस्तान के बीच है, इसलिए इसमें हुर्रियत का कोई काम नहीं। इसके बाद पाकिस्तान ने बातचीत तोड़ दी थी।
साफ़ है कि आतंकवाद पर बातचीत से मुकरने वाला, भारत में लगातार आतंकवाद की सप्लाई करने वाला और बार-बार सीज़फायर का उल्लंघन कर सीमा पर युद्ध जैसे हालात बनाए रखने वाला पाकिस्तान सलमान खुर्शीद को अमन का कबूतर नज़र आता है, जबकि सीमा-पार आतंकवाद का शिकार और कश्मीर में हर रोज़ पाकिस्तानी घुसपैठ और हिंसा झेलने को विवश भारत उन्हें अमन का दुश्मन नज़र आता है।
…और अब एक बार फिर उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा लाल किले से बलूचिस्तान का मुद्दा उठाए जाने की यह कहते हुए आलोचना की है कि इससे पीओके में भारत का केस कमज़ोर हो जाएगा। जैसे कि कांग्रेस पार्टी ने तो पिछले 70 साल में पीओके पर भारत का दावा बेहद मज़बूत बना दिया था और अब पीएम मोदी के बयान से वह दावा अचानक बेहद कमज़ोर हो गया है।