
बिहार में शराबबंदी कानून को सख्ती से अमल में लाने के लिए अधिकारियों ने कार्रवाई तेज कर दी है। इसके तहत अधिकारी अब सामूहिक जुर्माना लगाने की योजना पर उतर आए हैं। नालंदा के जिलाधिकारी ने एक गांव पर उत्पाद कानून के तहत सामूहिक जुर्माने का प्रस्ताव दिया है।
करीब 50 घरों वाले जिले के कैलाशपुरी गांव के हर घर पर 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव जिलाधिकारी ने दिया है। इस संबंध में हर घर को नोटिस भेजा जाएगा। राज्य में लागू बिहार उत्पाद (संशोधन) अधिनियम, 2016 के तहत सामूहिक जुर्माना लगाने का यह संभवतः पहला प्रस्ताव है।
जिले को शराबमुक्त बनाने के उद्देश्य से डीएम डॉ. त्यागराजन एस. मोहनराम ने कठोर निर्णय लिया। इस्लामपुर प्रखंड के रानीपुर पंचायत के कैलाशपुरी गांव के सभी 50 घरों पर 5-5 हजार का जुर्माना लगाया गया है। डीएम के इस आदेश के बाद गांव के लोगों को उत्पाद अधीक्षक के पास जुर्माने की राशि जमा करानी होगी। राशि जमा नहीं करने पर नोटिस भेजकर कार्रवाई की जाएगी।
इस प्रस्ताव की पुष्टि करते हुए नालंदा के जिलाधिकारी त्यागराजन एसएम ने बताया कि, शराबबंदी के खिलाफ गांव में सामूहिक प्रवृत्ति पाई गई है, इसलिए पहली नजर में सामूहिक जुर्माने का मामला बनता है। उन्होंने कहा कि अप्रैल से प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी तथा इस संबंध में लगातार अपील के बावजूद इस गांव में अवैध शराब का कारोबार चल रहा था। इसे देखते हुए मद्य निषेध के नए कानून के तहत प्रत्येक परिवार पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
जिलाधिकारी ने बताया कि, 01 अप्रैल 2016 से शराबबंदी लागू होने के बाद से 07 अगस्त 2016 तक पुलिस एवं आबकारी विभाग ने अवैध शराब के कारोबार से जुड़े 189 लोगों को गिरफ्तार किया है।
वहीं, उत्पाद अधीक्षक रामबाबू ने बताया कि, डीएम के आदेश पर कैलाशपुरी गांव में शराब निर्माण व बिक्री रोकने के लिए सात बार छापेमारी की गयी। गांव के कई लोग अपने घरों की बजाय सड़क किनारे शराब बनाते थे। छापेमारी के दौरान पूछने पर गांव का कोई भी व्यक्ति बताने से साफ इंकार कर जाता था। इस कारण किसी खास पर कार्रवाई नहीं हो पा रही थी। आखिरकार, डीएम ने सामूहिक जुर्माना लगाने का कठोर निर्णय लिया।
बता दें कि नालंदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पैतृक जिला है। पिछले मॉनसून सत्र के दौरान 01 अगस्त को बिहार विधानमंडल द्वारा बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद विधेयक, 2016 को ध्वनि मत से पारित किया गया है। इसने बिहार उत्पाद (संशोधन) विधेयक 2015 का स्थान लिया है। नए कानून में इस जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
बिहार में सत्ताधारी महागठबंधन में शामिल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और जनता दल (युनाइटेड) के नेता राज्य में शराब प्रतिबंध कानून लागू करने को लेकर एक बार फिर आमने-सामने हो गए। राजद के एक नेता, जहां राज्य के बड़े नेताओं और अधिकारियों पर शराब मंगाकर पीने का आरोप लगाया, वहीं जद (यू) के प्रवक्ता ने राजद नेता पर ही शराब पीने का आरोप लगा दिया।
राजद के विधायक वीरेंद्र ने कहा कि बिहार में शराबबंदी के बाद भी बड़े नेता और अधिकारी बाहर से शराब मंगाकर पी रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों पर सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए। ये लोग बिहार में शराबबंदी का मजाक उड़ा रहे हैं।
इधर, जद (यू) के प्रवक्ता संजय सिंह ने राजद विधायक के इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि अगर वे आरोप लगा रहे हैं, तो उनको इसका साक्ष्य भी देना चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा कि ऐसा हो सकता है कि आरोप लगाने वाले ही पीते हों।
उल्लेखनीय है कि बिहार में शराब पर प्रतिबंध को लेकर राजद के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह भी कई मौकों पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते रहे हैं। बिहार में अप्रैल से ही शराब प्रतिबंधित है।