
जयपुर। इन दिनों गौ-रक्षा का मुद्दा गली-मोहल्लों से लेकर संसद तक उठ रहा है। हाल ही में पीएम मोदी ने कहा कि कुछ लोग गौरक्षक के नाम पर दुकान खोलकर बैठ गए हैं और कुछ लोग पूरी रात असमाजिक कार्यों में लिप्त रहते हैं और दिन में गौरक्षक का चोला पहन लेते हैं। मोदी इतने पर भी नहीं रूके, उन्होंने कहा कि ऐसे गौरक्षक में से 80 फीसदी लोग गोरखधंधे में लिप्त हैं। हालांकि मोदी की इस बात का कथित गौ रक्षकों ने विरोध भी किया, लेकिन मोदी जी की इस बात की सत्यता का प्रमाण राजस्थान के जयपुर में भी देखने को मिला।
वैसे तो राजस्थान की राजधानी जयपुर के पास हिंगोनिया गौशाला में हुई गायों की मौत का मुद्दा पूरे देश में सुर्खियां बटोर रहा है, लेकिन वहीं कई कथित गौ-रक्षक भी दिखाई दिए। जो गायों की मौत के विरोध में गौशाला के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन दलदल में फंसी गायों की मदद के लिए कोई भी हाथ नहीं बंटा रहा था। गौ-सेवा तो दूर कथित गौ-रक्षक वहां रिपोर्टिंग करने गए पत्रकारों से इंटरव्यू लेने के लिए बोल रहे थे और कुछ तो अपने कार्ड भी बांट रहे थे।
पहले तो आपको बता दें कि हिंगोनिया में ऐसा क्या हुआ है कि एक गौशाला का मुद्दा पूरे देश में उठ रहा है। दरअसल राजस्थान की बड़ी गौशालों में से एक हिंगोनिया में कई गायें पाली जाती हैं। वहां जयपुर शहर की सड़कों पर घूम रही अवारा गायों को भी यहां लाकर रखा जाता है। लेकिन पिछले दिनों से सैलरी को लेकर हड़ताल पर गए कर्मचारियों की वजह से और बारिश के कारण एक हफ्ते में करीब 500 गायों की मौत हो गई है। ऐसे तो वहां के हालात कभी भी ठीक नहीं होते हैं लेकिन इन दिनों कुछ ज्यादा ही खराब होते हैं। गायों की मौत को लेकर हाईकोर्ट से पड़ी लताड़ और मीडिया के दबाब के चलते सरकार ने गायों के लिए कुछ काम किया है।
गायों को बचाना मुश्किल
जयपुर की हिंगोनिया गौशाला के अस्पताल के आईसीयू में 160 गायें मरने की कतार में हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इन्हें बचाना मुश्किल है। अस्पताल के आईसीयू में एक गाय का ऑपरेशन में उसके पेट से प्लास्टिक की थैलियों और कीलों का अंबार निकाला गया। डॉक्टरों का कहना है कि शहर में प्लास्टिक खाने से पहले से ही कमजोर गायें गौशाला में आ रही है, फिर बारिश के कीचड़ में कमजोर हालत की वजह से ये निकल नहीं पाई, या फिर पौष्टिक चारा नहीं मिलने से कमजोर हो गई। ऐसी ही गायों को बचाने के लिए अस्पताल में 17 डॉक्टर गायों के ऑपरेशन में जुटे हुए हैं। ज्यादातर गायों के पेट से कई किलो प्लास्टिक निकल रहा है।
गौरक्षक रहे नदारद
हालांकि हिंगोनिया का मुद्दा स्थानीय अखबारों में कई सालों से उठाया जा रहा है, लेकिन कथित गौ-रक्षक कभी भी सामने नहीं आए और उन्होंने कोई आवाज नहीं उठाई... मगर नेशनल मीडिया के कैमरे हिंगोनिया पहुंचते ही गौ-रक्षकों में गाय के लिए प्रेम उमड़ पड़ा। गौ रक्षक तो दूर वहां के कर्मचारी भी गायों को लेकर काफी लापरवाह हैं।
इसी बीच आईबीएन खबर ने एक ऐसे शख्स से खास बातचीत की, जिसकी गाय भी नगर निगम वाले ले गए थे, लेकिन गनीमत रही कि उस शख्स ने समय रहते हुए अपनी गाय को बचा लिया और घर ले आया। जयपुर के रहने वाले किशोर सिंह ने बताया कि वहां गायों की हालत इतनी खराब है कि वहां कोई आदमी काफी देर तक नहीं रह सकता। उसके अनुसार वहां अवारा गायों को एक जगह छोड़ दिया जाता है और अगर गाय को एक-दो दिन रखा जाता है तो उसके पैसे भी वसूले जाते हैं।
साथ ही किशोर सिंह ने ये भी बताया कि अगर गाय दूध देने वाली होती है तो हिंगोनिया प्रशासन उसे छुपा लेता है और बाद में उसे बाहर किसी को बेच देता है। हालांकि राजस्थान में गौशाला के लिए अच्छा-खासा बजट भी पास किया जाता है और गायों के लिए सूबे की सरकार में एक विभाग भी है। बावजूद इसके इस कदर लापरवाही बरती गई कि सैकड़ों गायों को जान से हाथ धोना पड़ा।