
पिछले महीने की ही बात है. 26 जुलाई को एफआईआर दर्ज की गई. लेकिन इसकी जांच सभी से बचा कर की जा रही है. लोधी कालोनी इलाके में स्थित सीआरपीएफ मुख्यालय की तरफ से क्राइम ब्रांच में आई शिकायत के बाद इस संबंध में 66सी, 66डी आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है.
अब इस बारे में जांच से जुड़े कोई भी वरिष्ठ अधिकारी बयान देने को तैयार नहीं हैं. दिल्ली पुलिस की साइबर-सेल में भी इसका मामला दर्ज है और इसकी जांच की जा रही है.
अब बेचारे अधिकारी कहें भी तो क्या कहें. कोई जवाब भी नहीं हैं. हां, मगर इस बार कार्रवाई ज़रूर होनी चाहिए. आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो सकती है?
राहुल गांधी का भी नाम आया था. कुछ दिन पहले ही आगरा में राहुल गांधी के नाम पर आधार कार्ड जारी हो गया था. जिसके बाद काफी हंगामा हुआ था. लेकिन उससे भी कोई सीख नहीं ली गई. हालांकि उस वक्त बीजेपी नेताओं ने बहुत हंसी उड़ाई मगर शायद अब तो बीजेपी नेता प्रधानमंत्री के हवलदार वाले प्रवेश पत्र पर कुछ नहीं कह पा रहे होंगे.
दिग्विजय सिंह का नाम तो गरीबी रेखा के नीचे आ गया था. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव का नाम तो मध्य प्रदेश सरकार ने गरीबी रेखा के नीचे ही ला दिया. हालांकि इस बात का खुलासा खूद दिग्गी राजा ने ही किया. शायद अब ये देश में आम बात हो गई है कि किसी का नाम कभी भी, कहीं भी आ सकता है.