कारगिल की लड़ाई की ये सच्चाई जो बदल देती पाकिस्तान का नक्शा!

नई दिल्लीः कारगिल युद्ध को 17 साल से ज्यादा बीत चुके हैं और इस लड़ाई में भारत ने पाकिस्तान को जो धूल चटाई थी वो आज तक पाकिस्तान भूला नहीं है. लेकिन इस लड़ाई से जुड़ी कुछ सच्चाइयां ऐसी हैं जिनसे आज तक पर्दा नहीं हटा है और इन्हीं में से एक खबर ऐसी है जिसे जानने के बाद आपको अपनी सेना, आर्मी और जवानों पर और भी गर्व होगा. आगे पढ़ें क्या है वो बड़ी खबर..
जून 13 1999 में जब कारगिल की लड़ाई जारी थी तब भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के अंदरूनी इलाकों तक हवाई हमले करने की पूरी तैयारी कर ली थी. पाकिस्तान के इलाकों पर भारी हवाई हमला करने से भारतीय वायु सेना सिर्फ कुछ मिनट दूर थी और अगर ऐसा हो जाता तो इतिहास ही बदल जाता. एनडीटीवी के हवाले से मिली खबरों के मुताबिक पाकिस्तानी इलाकों पर हमले के टार्गेट तक तय हो चुके थे. इसके लिए रूट फाइल किए जा चुके थे, पायलट्स को उनकी व्यक्तिगत बंदूक और पाकिस्तानी करेंसी से लैस कर दिया गया था जिससे अगर उन्हें पाकिस्तान में घुसना पड़े तो वहां भी वो कड़ा मुकाबला कर सकें.
एनडीटीवी ने भारतीय वायु सेना के दस्तावेजों के आधार पर ये दावा किया है कि हवाई लड़ाके लाइन ऑफ कंट्रोल पार कर पाकिस्तान को तगड़ा जवाब देने के लिए बॉम्बिंग मिशन पर निकलने वाले थे. जाहिर तौर पर इसका मतलब था कि दो परमाणु शक्ति संपन्न देश भारत और पाकिस्तान के बीच पूरी तरह खुली लड़ाई छिड़ने वाली थी जिसका अंजाम बेहद भयानक हो सकता था. जबकि कारगिल की लड़ाई कुछ तौर पर नियंत्रण के दायरे में चल रही थी.
एयरफोर्स के जरिए हवाई हमला करने की नौबत इसलिए आई क्योंकि तब भारत और पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री जसवंत सिंह और सरताज अजीज के बीच लड़ाई रोकने की संभावनाओं पर चल रही बातचीत सफल नहीं हो पाई. युद्ध रोकने के लिए सरताज अजीज को साफ तौर पर कहा गया था कि पाकिस्तान को कारगिल की पहाड़ियों से घुसपैठिओं को हटाना होगा. कश्मीर से लाइन ऑफ कंट्रोल को दोबारा परिभाषित करने की मांग वापस लेनी होगी और दशकों से चले आ रहे एलओसी पर दोनों देशों के तटस्थ रुख को बरकरार रखना होगा. इसके अलावा साफ मांग की गई कि उन पाकिस्तानी जवानों को सजा दी जाए जिन्होंनें 6 भारतीय जवानों जिनमें कैप्टन सौरभ कालिया भी शामिल थे के शवों को शत-विक्षत रूप में वापस किया था. हालांकि इन बातों का कोई हल नहीं निकला और पाकिस्तानी विदेश मंत्री सरताज अजीज वापस लौट गए.
एनडीटीवी को मिले दस्तावेजों के हिसाब से इसके आगे की कहानी ये है कि 13 जून को पाकिस्तान पर हवाई हमले करने की पूरी योजना तैयार हो चुकी थी और सुबह 4.30 पर एयरफोर्स के विमान पूरे लाव-लश्कर के साथ पाकिस्तान को धूल चटाने के लिए मुस्तैद थे लेकिन ”नो गो” ऑर्डर्स की वजह से दोपहर से हमला नहीं किया गया और दोपहर 12.30 बजे तक फाइटर प्लेन जिनमें मिग21एस भी शामिल थे अपने बेस पर लौट आए.
हालांकि इस जोरदार काम को किए बिना ही भारतीय सेना ने पाकिस्तान के छक्के छुड़ा दिए और जुलाई 1999 तक कारगिल की जिन पहाड़ियों पर पाकिस्तान ने कब्जा कर लिया था उन्हें वापस छुड़ा लिया. 17 सालों तक ये राज दबा रहा कि पाकिस्तान पर हवाई हमले की पूरी तैयारी होने के बावजूद भारत ने संयम नहीं खोया और बेहतर स्थिति में होने के बावजूद एयरफोर्स हमले का इस्तेमाल ना करते हुए जमीनी लड़ाई में दुश्मन को नाकों चने चबवा दिए.