
नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से कांग्रेस लगातार उनका हर मुद्दे पर विरोध कर रही है। राष्ट्रवाद और देशभक्ति के मुद्दे पर भी कांग्रेस अक्सर केंद्र सरकार को निशाने पर लेती रही है। प्रधानमंत्री का विरोध कांग्रेस अपने सियासी वजूद को बचाने के लिए करती है। अगर वो विरोध नहीं करेगी तो उसकी प्रासंगिकता खत्म हो जाए। फिलहाल न चाहते हुए भी कांग्रेस अब प्रधानमंत्री की नीतियों का समर्थन कर रही है।
भारत की पूर्वी सीमा पर ब्रह्मोस मिसाइलों की तैनाती के मामले में कांग्रेस अब मोदी सरकार के साथ है। कांग्रेस ने कहा है कि सरकार को इस तरह के कदम उठाने चाहिए। पाकिस्तान के खिलाफ भी इसी तरह के सख्त कदम उठाने की जरूरत है। कांग्रेस के नेता खुलकर चीन को लेकर प्रधानमंत्री की नीति का समर्थन कर रहे हैं। क्या ये माना जाए कि कांग्रेस के रुख में बदलाव आ रहा है। या फिर वो सियासी अकेलेपन का शिकार होने से बचने के लिए ये सब कर रही है।
कांग्रेस के नेता टॉम बड़क्कन ने कहा कि भारत जब भी अपनी सैन्य ताकत बढ़ाता है चीन परेशान हो जाता है। चीन की नाराजगी के बाद भी भारत को इस तरह के कदम उठाते रहने चाहिए। टॉम बड़क्कन ने कहा कि इस नीति को पाकिस्तान के संदर्भ में भी लागू किया जाना चाहिए। कई बार ये जरूरी हो जाता है कि अपनी ताकत दिखानी पड़ती है। आपके पड़ोसी देशों को पता होना चाहिए कि आप कभी भी पलटवार कर सकते हैं।
भारत ने चीन से लगी पूर्वी सीमा पर अत्याधुनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलों की तैनाती की है। भारत के इस कदम का चीन ने विरोध किया था। चीन ने कहा कि इस से सीमा पर शांति भंग हो सकती है। इस महीने की शुरूआत में पीएम मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की सुरक्षा कमेटी ने ब्रह्मोस मिसाइलों की तैनाती को हरी झंडी दी थी।