
बुलंद इरादे और हौसले के बल पर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराने के लिए कानपुर की दस वर्षीया श्रद्धा शुक्ला गंगा की उफनाती- इठलाती लहरों के बीच तैरकर बनारस तक कुल 570 किलोमीटरका सफर तय करने हेतु 28 अगस्त को कानपुर के मैस्करघाट से गंगा में उतर गई।
श्रद्धा इलाहबाद तक जाने के दौरान चार स्थानों पर रात में रुकेगी। पहला पड़ाव चण्डिका देवी बक्सर उन्नाव, दूसरा पड़ाव फतेहपुर, तीसरा पड़ाव कौशाम्बी और चौथा आखरी पड़ाव इलाहबाद होगा। वह हर रोज लगभग 100 किलोमीटर तैरेगी।
कानपुर से बनारस तक तैराकी के इस सफर में श्रद्धा के साथ दस गोताखोरों का दस्ता उसकी सुरक्षा के लिए गंगा में मौजूद रहेगा, ये गोताखोर 5-5 के ग्रुप में उसके साथ तैरेंगे। इमरजेंसी में निपटने के लिए नाविक के साथ 4 नाव गंगा में हर वक्त तैयार रहेगी, जिस पर डॉक्टरों की टीम भी होगी।
श्रद्धा के पिता ललित कुमार शुक्ला ने बताया कि श्रद्धा का तैराकी से नाता ढाई साल की उम्र से है। श्रद्धा के बाबा मुन्नू लाल शुक्ला गंगा नहाने के दौरान दो साल की श्रद्धा को भी अपने साथ ले जाने लगे थे। बाबा के साथ गंगा में स्नान करते हुए धीरे- धीरे श्रद्धा की दिलचस्पी तैरने में होने लगी, और कुछ ही महीने में श्रद्धा तैरना सीख गई। चार साल की उम्र होने तक श्रद्धा एक कुशल तैराक बन गई।
श्रद्धा तैराकी के अपने जूनून में मात्र साढ़े पांच साल की उम्र में शुक्लागंज पुल से सिधनाथ घाट तक तैर चुकी है। 2014 में सावन के महीने खतरे के निशान को छू रही गंगा में 16 किलोमीटर की दूरी सरसैया घाट से सिधनाथ घाट तक तैराकी 72 मिनट में तय किया था। इसके बाद श्रद्धा कानपुर से इलाहाबाद तक 270 किलोमीटर तैर कर गई थी।
श्रद्धा ने तैराकी में कई रिकार्ड बनाये हैं और अब वो चाहती है कि उनका नाम गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज हो। इसके अलावे उसका सपना ओलम्पिक में मेडल जीतने का है।