
जम्मू कश्मीर में अकेले दम पर चार आतंकियों को मार गिराने वाले शहीद हवलदार हंगपन दादा को सरकार की ओर से अशोक चक्र से सम्मानित किया गया है। 36 साल के इस बहादुर हवलदार ने शमसाबरी रेंज में 13,000 फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिश कर रहे आतंकियों से सीना तान कर लोहा लिया था।
हवलदार हंगपन दादा का साहस
सेना के मुताबिक 26 मई को शुरू हुए इस मुठभेड़ में उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए अद्भुत साहस का परिचय दिया। आतंकी गतिविधि को भांपते ही मुकाबले के लिए उतर गए। मुठभेड़ में बुरी तरह घायल होने के बावजूद वह डटे रहे। उन्हें बाद में अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उन्होंने आखिरी सांस ली।
अरुणाचल प्रदेश के सुदूरवर्ती बोदुरिया गांव के निवासी हंगपन ने भारी गोलीबारी के बीच अपने टीम के सदस्यों की भी जान बचाई। हंगपन दादा का शव उनके पैतृक आवास ले जाया गया जहां उनका पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। हंगपन दादा के परिवार में उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं।
1997 में सेना के असम रेजिमेंट में शामिल होने वाले दादा 35 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे। इसके बाद उन्हें कई जगह तैनाती मिली। हवलदार हंगपन दादा की शहादत पर उनके परिवार को गर्व है। परिवारवालों का कहना है कि उनके बेटे ने देश के लिए जान न्योछावर की है। आने वाली पीढि़यां भी उनसे सीख लेंगी।