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डेंगू के लिए रामबाण हैं ये घरेलू आयुर्वेदिक नुस्‍खे

पूरे देश में और खासकर उत्‍तर प्रदेश में आजकल डेंगू की बीमारी बहुत जोरों पर है। यह बीमारी मच्‍छरों के काटने से फैलती है। अब तक कई लोग इस बीमारी की भेंट चढ़ चुके हैं।

यह एक ऐसा वायरल रोग है जिसका मेडिकल चिकित्सा पद्धति में कोई इलाज नहीं है परन्तु आयुर्वेद में इसका इलाज है और वो इतना सरल और सस्ता है की उसे कोई भी कर सकता है l

डेंगू से बचने के घरेलू उपाय

यदि आपके किसी भी जानकार को यह रोग हुआ हो और खून में प्लेटलेट की संख्या कम होती जा रही हो तो चित्र में दिखाई गयी चार चीज़ें रोगी को दें
अनार जूस
गेहूं घास रस
पपीते के पत्तों का रस
गिलोय/अमृता/अमरबेल सत्व

अनार जूस तथा गेहूं घास रस नया खून बनाने तथा रोगी की रोग से लड़ने की शक्ति प्रदान करने के लिए है, अनार जूस आसानी से उपलब्ध है यदि गेहूं घास रस ना मिले तो रोगी को सेब का रस भी दिया जा सकता है l

पपीते के पत्तों का रस सबसे महत्वपूर्ण है, पपीते का पेड़ आसानी से मिल जाता है उसकी ताज़ी पत्तियों का रस निकाल कर मरीज़ को दिन में २ से ३ बार दें , एक दिन की खुराक के बाद ही प्लेटलेट की संक्या बढ़ने लगेगी l

गिलोय की बेल का सत्व मरीज़ को दिन में २-३ बार दें, इससे खून में प्लेटलेट की संख्या बढती है, रोग से लड़ने की शक्ति बढती है तथा कई रोगों का नाश होता है l यदि गिलोय की बेल आपको ना मिले तो किसी भी नजदीकी पतंजली चिकित्सालय में जाकर “गिलोय घनवटी” ले आयें जिसकी एक एक गोली रोगी को दिन में 3 बार दें l

सोनिया गांधी को अस्पताल से मिली छुट्टी

(19 अगस्त): कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को सर गंगा राम अस्पताल से मिली छुट्टी मिल गई है। वो अस्पताल से सीधे 10 जनपथ पहुंची। मिशन यूपी के दौरान वाराणसी में रोड-शो के दौरान अचानक उसकी तबियत बिगड़ गई थी। इसके बाद उन्हें चार्टर्ड विमान से दिल्‍ली लाया गया गया और आर्मी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में सोनिया गांधी को 3 अगस्त को सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

नवजात की मौत, परिवार ने नर्स पर लगाया आरोप

कोलकाता| पश्चिम बंगाल के जलपाइगुड़ी जिले में सोमवार को एक अस्पताल में नवजात की मौत हो गई। नवजात के परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल की एक नर्स ने नवजात को नीचे गिरा दिया, जिसके कारण उसकी मौत हो गई। यह घटना जलपाईगुड़ी सदर अस्पताल में सोमवार तड़के हुई।

नवजात की मौत
नवजात के पिता मोहम्मद हलीम ने कहा, “नर्स ने हमें आकर बताया कि हमारी बच्ची मरी हुई पैदा हुई। लेकिन बच्ची स्वस्थ पैदा हुई थी और उसके शरीर पर चोट के कई निशान थे। उसके सिर पर भी चोट के निशान थे। हमें आशंका है कि नर्स ने उसे फर्श पर गिरा दिया।”

अस्पताल ने हालांकि इस तरह की किसी गड़बड़ी से इंकार किया है।

अस्पताल के एक चिकित्सक ए.के. चक्रबर्ती ने कहा, “जच्चा को अंतिम समय में यहां प्रसव के लिए लाया गया था, जिसके कारण मामला जटिल हो गया था। नवजात की मौत मामले की जटिलताओं के कारण हुई। न तो बच्ची के शरीर पर चोट के कोई निशान हैं, और न तो नर्स ने उसे गिराया ही है, जैसा कि आरोप लगाया जा रहा है।”

इस बीच कोलकाता की बिधाननगर इलाके में डेंगू के एक मरीज को स्वतंत्रता दिवस की छुट्टी का हवाला देकर एक चिकित्सा जांच रपट से इंकार कर दिया गया।

डेंगू मरीज ने कहा, “प्लेटलेट काउंट जानने के लिए मैंने एक जांच कराई थी। रपट आज मिलनी थी। लेकिन मुझे रपट नहीं मिली, क्योंकि प्रयोगशाला कर्मी स्वतंत्रता दिवस की छुट्टी पर हैं।”

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब राज्य में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अब तक डेंगू के 2,500 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। कम से कम 16 लोगों की इस बीमारी के कारण मौत हो चुकी है।

स्वास्थ्य बीमा योजना लागू होने में 15 दिन की देरी

पणजी| गोवा सरकार ने सर्वजन स्वास्थ्य बीमा योजना का शुभारंभ स्वास्थ्य कार्ड बांटने में देरी की वजह से पंद्रह दिनों के लिए टाल दिया है। मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर ने सोमवार को यह जानकारी दी।

स्वास्थ्य बीमा योजना

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पारसेकर ने कहा कि पंजीकृत हुए 1.38 लाख परिवारों में से सिर्फ 40,000 को स्वास्थ्य कार्ड दिया जा सका है। इसी वजह से इसे लागू करने में 15 दिन की देरी की जा रही है।

दीन दयाल स्वास्थ्य सेवा योजना में हर गोवावासी को 2 लाख रुपये से ऊपर की स्वास्थ्य बीमा, 400 से ज्यादा चिकित्सकीय प्रक्रियाओं के लिए वादा किया गया है।

यह राज्य सरकार की बड़ी प्रस्तावित योजनाओं में से एक है। इसका शुभारंभ स्वतंत्रता दिवस के मौके ही किया जाना था।

पारसेकर ने कहा, अंतिम हफ्ते में समाप्त हुए मानसून सत्र के लंबे होने की वजह से योजना की कार्यवाही सही तरीके से पूरी नहीं हो सकी। इसी वजह से इस योजना में देरी हुई।

उन्होंने कहा, “हम विधानसभा की कार्यवाही में व्यस्त थे, और इसमें इच्छानुसार कार्यवाही पूरी नहीं हो सकी। मैंने पाया कि बीमा कंपनी हर रोज 5000 कार्ड ही बना पा रही थी। कम से कम पंजीकृत परिवारों को तो कार्ड मिलना चाहिए।”

पारसेकर ने कहा, “निस्संदेह अगले कुछ दिनों में कुछ अतिरिक्त परिवार भी पंजीकृत होंगे। इसलिए 40,000 से शुरू करने की बजाय, यदि हम एक लाख परिवारों से इसकी शुरुआत करें तो यह एक अच्छी संख्या होगी।”

दादी-नानी के नुस्‍खे : ये घरेलू नियम अपनाएंगे तो कभी नहीं होगा दांत दर्द

दांतों से जुड़ी हर समस्या के पीछे हमारी गलत खानपान और रहन-सहन की आधुनिक जीवन शैली है। चाय-कॉफी जैसे बेहद गर्म पेय तथा कोलड्रिक्स दोनों ही दांतों की जड़ों को कमजोर और खोखला कर देते हैं। सबसे असहनीय होता है दांत दर्द । ताजा तथा प्राकृतिक खानपान और सफाई के प्रति जागरूकता ही हमें दातों की समस्या से स्थाई छुटकार दिला सककी है।

आजकल गलत खान-पान और ठीक से देखरेख न करने के कारण लोगों में दांत के दर्द की समस्या आम हो गई है। छोटे छोटे बच्चों को अक्सर दांत में दर्द होने की शिकायत होती है। आयुर्वेद में दांतों में दर्द की समस्या का बहुत आसान उपाय बताया है।

आयुर्वेद में एक कहावत है- नमक महीन लीजिए, अरु सरसों का तेल। नित्य मले रीसन मिटे, छूट जाए सब मैल।।

सैंधा नमक को कपड़े से छान लें। नमक को हाथ पर रखकर उसमें सरसों का तेल मिला लें। इस मिश्रण से दातों पर हल्के-हल्के मसाज करें बाद में साफ पानी से कुल्ला कर लें। इस विधि को अपनाने से आपको दातों की कई समस्याओं से निजात मिल जाएगी। इससे दातों में दांतों में पीलापन नहीं आता, दांत साफ और मजबूत होते हैं, कीड़े नहीं लगते, दर्द, मसूड़ों की सूजन, इनसे खून निकलना बन्द हो जाता है।

मसूढों और जबडों में होने वाली पीडा को दंतशूल से परिभाषित किया जाता है। हममें से कई लोगों को ऐसी पीडा अकस्मात हो जाया करती है। दांत में कभी सामान्य तो कभी असहनीय दर्द उठता है। रोगी को चेन नहीं पडता। मसूडों में सूजन आ जाती है। दांतों में सूक्ष्म जीवाणुओं का संक्रमण हो जाने से स्थिति और बिगड जाती है। मसूढों में घाव बन जाते हैं जो अत्यंत कष्टदायी होते हैं।दांत में सडने की प्रक्रिया शुरु हो जाती है और उनमें केविटी बनने लगती है।जब सडन की वजह से दांत की नाडियां प्रभावित हो जाती हैं तो पीडा अत्यधिक बढ जाती है।

बाय बिडंग १० ग्राम,सफ़ेद फ़िटकरी १० ग्राम लेकर तीन लिटर जल में उबालकर जब मिश्रण एक लिटर रह जाए तो आंच से उतारकर ठंडा करके एक बोत्तल में भर लें। दवा तैयार है। इस क्वाथ से सुबह -शाम कुल्ले करते रहने से दांत की पीडा दूर होती है और दांत भी मजबूत बनते हैं।

दांत दर्द में ये उपचार करें

लहसुन में जीवाणुनाशक तत्व होते हैं। लहसुन की एक कली थोडे से सैंधा नमक के साथ पीसें फ़िर इसे दुखने वाले दांत पर रख कर दबाएं। तत्काल लाभ होता है। प्रतिदिन एक लहसुन कली चबाकर खाने से दांत की तकलीफ़ से छुटकारा मिलता है।

हींग दंतशूल में गुणकारी है। दांत की गुहा(केविटी) में थोडी सी हींग भरदें। कष्ट में राहत मिलेगी।

तंबाखू और नमक महीन पीसलें। इस टूथ पावडर से रोज दंतमंजन करने से दंतशूल से मुक्ति मिल जाती है।

बर्फ़ के प्रयोग से कई लोगों को दांत के दर्द में फ़ायदा होता है। बर्फ़ का टुकडा दुखने वाले दांत के ऊपर या पास में रखें। बर्फ़ उस जगह को सुन्न करके लाभ पहुंचाता है।

कुछ रोगी गरम सेक से लाभान्वित होते हैं। गरम पानी की थैली से सेक करना प्रयोजनीय है।

प्याज कीटाणुनाशक है। प्याज को कूटकर लुग्दी दांत पर रखना हितकर उपचार है। एक छोटा प्याज नित्य भली प्रकार चबाकर खाने की सलाह दी जाती है। इससे दांत में निवास करने वाले जीवाणु नष्ट होंगे।

लौंग के तैल का फ़ाया दांत की केविटी में रखने से तुरंत फ़ायदा होगा। दांत के दर्द के रोगी को दिन में ३-४ बार एक लौंग मुंह में रखकर चूसने की सलाह दी जाती है।

नमक मिले गरम पानी के कुल्ले करने से दंतशूल नियंत्रित होता है। करीब ३०० मिलि पानी मे एक बडा चम्मच नमक डालकर तैयार करें।दिन में तीन बार कुल्ले करना उचित है।

पुदिने की सूखी पत्तियां पीडा वाले दांत के चारों ओर रखें। १०-१५ मिनिट की अवधि तक रखें। ऐसा दिन में १० बार करने से लाभ मिलेगा।

दो ग्राम हींग नींबू के रस में पीसकर पेस्ट जैसा बनाले। इस पेस्ट से दंत मंजन करते रहने से दंतशूल का निवारण होता है।

मेरा अनुभव है कि विटामिन सी ५०० एम.जी. दिन में दो बार और केल्सियम ५००एम.जी दिन में एक बार लेते रहने से दांत के कई रोग नियंत्रित होंगे और दांत भी मजबूत बनेंगे।

मुख्य बात ये है कि सुबह-शाम दांतों की स्वच्छता करते रहें। दांतों के बीच की जगह में अन्न कण फ़ंसे रह जाते हैं और उनमें जीवाणु पैदा होकर दंत विकार उत्पन्न करते हैं।

शकर का उपयोग हानिकारक है। इससे दांतो में जीवाणु पैदा होते हैं। मीठी वस्तुएं हानिकारक हैं। लेकिन कडवे,ख्ट्टे,कसेले स्वाद के पदार्थ दांतों के लिये हितकर होते है। नींबू,आंवला,टमाटर ,नारंगी का नियमित उपयोग लाभकारी है। इन फ़लों मे जीवाणुनाशक तत्व होते हैं। मसूढों से अत्यधिक मात्रा में खून जाता हो तो नींबू का ताजा रस पीना लाभकारी है।

हरी सब्जियां,रसदार फ़ल भोजन में प्रचुरता से शामिल करें।

दांतों की केविटी में दंत चिकित्सक केमिकल मसाला भरकर इलाज करते हैं। सभी प्रकार के जतन करने पर भी दांत की पीडा शांत न हो तो दांत उखडवाना ही आखिरी उपाय है।

कसरत से दूर होती है भूलने की बीमारी

एरोबिक व्यायाम करने से मेमोरी लॉस और सिजोफ्रेनिया जैसी बीमारियों के शिकार लोगों की याददाश्त में सुधार होती है। एक नए शोध में यह बात सामने आई है। सिजोफ्रेनिया जैसी दीर्घकालिक मानसिक समस्या का आमतौर पर दवाइयों से इलाज किया जाता है। लेकिन इससे याददाश्त में बहुत ज्यादा सुधार नहीं होता।

लोगों की याददाश्त

प्रमुख शोधार्थी ब्रिटेन के मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के जोसेफ फिर्थ का कहना है, “सिजोफ्रेनिया जैसी बीमारी में याददाश्त का कमजोर पड़ना इस बीमारी का एक पहलू है। इसके कारण लोगों का निजी और सामाजिक जीवन काफी ज्यादा प्रभावित हो जाता है।”

इस शोध के निष्कर्षो से पता चलता है कि 12 हफ्तों तक एरोबिक व्यायाम करने से मरीज की याददाश्त काफी सुधरती है। साथ ही वह एक समय में अधिक चीजों को भी याद कर पाता है।

शोधकर्ताओं ने बताया कि इस शोध से यह भी पता चला कि जिन मरीजों ने ज्यादा से ज्यादा एरोबिक कसरत की थी, उनकी याददाश्त पर उतना ही अच्छा प्रभाव पड़ा।

फिर्थ आगे कहते हैं, “इस शोध में सिजोफ्रेनिया के मरीजों के इलाज में शारीरिक व्यायाम के असर का बड़े पैमाने पर पहली बार सबूत मिला है।”

वे आगे कहते हैं, “इस बीमारी की शुरुआत में ही अगर कसरत शुरू कर दी जाती है तो यह दीर्घकालिक रूप से याददाश्त खोने जैसे दुष्प्रभाव से बचा सकता है। साथ ही मरीज जल्दी स्वस्थ भी होता है।”

यह शोध हाल ही में ‘सिजोफ्रेनिया बुलेटिन’ में प्रकाशित हुआ है।