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हिमाचल 200 गहरी खाई मे गिरी जीप, छह तीर्थयात्रियों की मौत

हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिले में शुक्रवार को एक जीप लुढ़ककर 200 फुट गहरी खाई में जा गिरी। इस घटना में छह तीर्थयात्रियों की मौत हो गई। पीड़ित भरमौर घाटी में स्थित भगवान शिव की पवित्र स्थली, मणिमहेश झील जा रहे थे।
यह दुर्घटना दुघली नाले के पास घटी, जो चंबा जिला मुख्यालय से कोई 20 किलोमीटर दूर है।

मृतकों की उम्र 25 से 30 वर्ष थी। इनकी पहचान पंकज बलोरिया, जसवंत सिंह, अभिनेष, समशेर सिंह, अनिल कुमार और सोनू के रूप में हुई है। सभी कांगड़ा जिले के नगरोटा बागवां में एक गांव के निवासी हैं।

पुलिस उपाधीक्षक वीर बहादुर ने संवाददाताओं से कहा कि वाहन चालक का संभवत: वाहन से नियंत्रण उस समय छूट गया, जब वह सामने से आ रही एक बस को पास दे रहा था। जीप सड़क से फिसल गई और खाई में जा गिरी।

वीर बहादुर ने कहा कि अधिकांश घायलों को चंबा शहर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

70 फीसदी लोग मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने के पक्ष में

कुल 70 फीसदी भारतीय खासकर युवा वर्ष 2019 में नरेंद्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री चुनने के पक्ष में हैं, वहीं करीब 64 फीसदी महिलाएं इसकी पक्षधर हैं। शुक्रवार को जारी एक ऑनलाइन सर्वेक्षण में यह खुलासा हुआ है। यह सर्वेक्षण न्यूज एप इनशॉर्ट्स ने विपणन एजेंसी इपसॉस के सहयोग से किया। सर्वेक्षण के मुताबिक, नरेंद्र मोदी को दोबारा सत्ता में लाने के सवाल पर 63,141 उपयोगकर्ताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी। 70 फीसदी ने ‘हां’, 17 फीसदी ने ‘नहीं’ तथा 13 फीसदी ने ‘पता नहीं’ में जवाब दिया। यह सर्वेक्षण एप पर ही किया गया।

‘यूथ ऑफ द नेशन पोल’ के द्वितीय संस्करण के मुताबिक, 64 फीसदी महिलाओं ने मोदी को दोबारा सत्ता में लाने के लिए ‘हां’ में जवाब दिया, 18 फीसदी ने ‘नहीं’ तथा 18 फीसदी ने ‘पता नहीं’ में जवाब दिया।

यह सर्वेक्षण 25 जुलाई से 17 अगस्त के बीच किया गया। इसमें हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों की आयु 35 वर्ष से कम थी।

इनशॉर्ट्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) तथा सह-संस्थापक अजहर इकबाल ने कहा, “शासन, राजनीति, व्यापार, करियर व प्रौद्योगिकी, उद्देश्य पर युवा शहरी भारत का दृष्टिकोण पेश कर हम काफी प्रसन्न हैं।”

सर्वेक्षण में आधे से अधिक (57 फीसदी) प्रतिभागी देश के कुछ राज्यों में शराबबंदी के पक्ष में हैं।

यह पूछे जाने पर किक्या कॉलेज परिसर में छात्र राजनीति को बंद कर देना चाहिए, 61 फीसदी ने ‘हां’, 32 फीसदी ने ‘नहीं’ तथा सात फीसदी लोगों ने ‘कह नहीं सकते’ में जवाब दिया।

वहीं छात्रों में 54 फीसदी ने ‘हां’, 37 फीसदी ने ‘नहीं’ तथा नौ फीसदी ने ‘कह नहीं सकते’ में जवाब दिया।

यह पूछे जाने पर कि क्या बीते दो वर्षो में दलितों व अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार में इजाफा हुआ है, 33 फीसदी ने ‘हां’, 46 फीसदी ने ‘नहीं’ तथा 21 फीसदी ने ‘कह नहीं सकते’ में जवाब दिया।

इप्सोस इंडिया के सीईओ अमित आदरकर ने कहा कि जिस तरीके से युवा देश के विभिन्न मुद्दों पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं, उसमें पैनापन है।

आदरकर ने कहा, “चाहे जो हो आखिरकार ये युवा प्रौद्योगिकी संपन्न व विचार रखने वाले हैं तथा उनका विचार मायने रखता है।”

हिजबुल कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर में बिगड़े हालात से जिस तरह से केंद्र सरकार ने निपटा, उसपर 49 फीसदी प्रतिभागियों ने मुहर लगाई, जबकि 24 फीसदी ने इसपर सवाल उठाए।

बाढ़ पीड़ितों ने अधिकारियों को बंधक बनाया और नदी में फेंक दिया

कटिहार/बिहार: बरारी प्रखण्ड के बारिनगर में बाढ़ पीड़ितों का जायजा लेने गए बरारी BDO और CO को पीड़ितों ने घेर लिया और रेलवे के केबिन में बंधक बना कर मुआवजे की मांग करने लगे। खाली हाथ पहुंचे अधिकारियों पर ग्रामीण भड़क गए और उन्हें उठाकर नदी में फैंक दिया। अधिकारियों ने किसी तरह तैरकर किनारा पकड़ा। 
इस पंचायत की ज्यादातर आबादी बाढ़ की चपेट में है। पीड़ितों का आरोप है कि यहाँ के पीड़ितों को किसी भी तरह का सरकारी राहत, मेडिकल की सुविधा नहीं मिल पा रही है। लोग घरों को छोड़कर रेल लाइन के किनारे रह रहे हैं, लेकिन सरकार का कोई भी नुमाइन्दा इन्हें आज तक देखने नहीं आया। बाढ़ पीड़ितों का गुस्सा इतना अधिक था कि उन्होंने अधिकारी को नदी में फेंक दिया। जिसके बाद किसी तरह नदी में तैरकर अधिकारियों ने अपनी जान बचाई।

बताते चलें कि इस साल भारत के 30 प्रतिशत से ज्यादा इलाके में बाढ़ का कहर बरपा है, जबकि सरकारें 10 प्रतिशत बाढ़ पीड़ितों तक भी मदद नहीं पहुंचा पाईं हैं। ऐसे मामलों में तत्काल राहत की जरूरत होती है परंतु आपात मीटिंगों के अलावा सरकारों की ओर से कोई त्वरित कार्रवाई नहीं की गई जिससे लोग आक्रोशित हैं। 

एक दिन की हड़ताल में 18000 करोड़ का नुक्सान

देशभर में करीब 18 करोड़ कर्मचारी/श्रमिक संगठन के सदस्य हड़ताल पर थे। इस भारत व्यापी हड़ताल का सबसे ज्यादा नुक्सान कारोबारी जगत को हुआ है। एसोचैम के अनुसार सिर्फ एक दिन में इस हड़ताल के कारण 16000 से 18000 करोड़ का नुक्सान हुआ है। 


उद्योग संगठन, एसोचैम (एसोसिएटेड चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया) ने एक बयान जारी कर कहा कि हड़ताल का असर ज्यादातर केरल, कर्नाटक, त्रिपुरा, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में देखा गया, जबकि दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में हड़ताल का कम असर रहा। इससे देश भर का कारोबार प्रभावित हुआ है।

एसोचैम का कहना है कि सच्चाई यह है कि भारत को अपनी सकल घरेलू उत्पाद दर तेजी से बढ़ानी है, इसलिए वह ऐसी हड़ताल नहीं झेल सकता। इसके लिए उत्पादन और सेवा समेत अन्य क्षेत्रों को बढ़ावा देने की जरूरत है। हड़ताल के कारण उत्पादन भी थमा और परिवहन सेवाएं भी बाधित रहीं, जिससे विकास की रफ्तार को धक्का लगा है।

अपने जन्मदिन के 13 दिन बाद मोदी करेंगे बड़ा धमाका

काले धन पर समुचित कार्रवाई नहीं करने के विपक्ष के आरोपों का सामना कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धन रखने वालों को चेताया है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा है कि ऐसा धन रखने वाले 30 सितम्बर तक उसकी घोषणा कर दें, अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
उल्लेखनीय है कि 17 सितम्बर को पीएम मोदी का जन्मदिन है। वहीं, काला धन घोषित करने के लिए सरकार की ओर से पहले ही 30 सितंबर अंतिम तिथि निर्धारित की गई है।

मोदी ने नेटवर्क 18 को दिए साक्षात्कार में काला धन पर कार्रवाई के संबंध में अपनी सरकार का बचाव किया और कहा, “मेरी सरकार ने काला धन पर सबसे पहले एसआईटी (विशेष जांच टीम) गठित की। यह काम कर रहा है और सर्वोच्च न्यायालय इसकी निगरानी कर रहा है। हमने कानून भी बनाए हैं, ताकि कोई भी धन भारत से विदेश न भेज सके।”

उन्होंने कहा, “देश में काला धन को लेकर कानून में बदलाव किया है और जो कोई भी 30 सितम्बर तक काले धन की घोषणा करना चाहता है, वह इससे जुड़ सकता है। यदि आपने जानबूझकर या अनजाने में (काला धन रखने) की गलती की है तो मैंने एक रास्ता दिया है.. यदि मैं 30 सितम्बर के बाद कोई कड़ी कार्रवाई करूं तो इसका दोष मुझपर नहीं होगा।”

सरकार ने एक जून को आय घोषणा योजना (आईडीएस) की शुरुआत की थी, जिसके तहत काला धन रखने वालों को 30 सितम्बर तक इसकी घोषणा करने और इसपर कर एवं दंड के रूप में 45 प्रतिशत का भुगतान कने की व्यवस्था है।

बीजेपी न आप, खुद की पार्टी से सिद्धू बुलंद करेंगे पंजाब की आवाज

देश के पूर्व क्रिकेटर और भारतीय जनता पार्टी के बागी नेता नवजोत सिंह सिद्धू अब न तो आम आदमी पार्टी में शामिल होंगे और न ही भाजपा में वापस जाएंगे बल्कि पंजाब में अगला चुनाव अपनी पार्टी से लड़ेंगे। सिद्धू ने अकाली दल के बागी नेता और भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्‍तान परगट सिंह के साथ नई पार्टी ‘आवाज-ए-पंजाब’ बनाने का ऐलान किया है। सिद्धू की इस पार्टी को लुधियाना के निर्दलीय विधायक बैंस बंधुओं का भी समर्थन मिल रहा है।

बैंस बंधुओं को हिंदी भाषी राज्यों खासकर उत्तर प्रदेश व बिहार के लोगों का पंजाब में व्यापक समर्थन प्राप्त है। इनमें सिमरजीत सिंह बैंस जिले के आत्मनगर और बलविंदर सिंह बैंस लुधियाना दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं।

सिद्धू की इस नयी राजनीतिक पारी का संकेत शुक्रवार को परगट सिंह और नवजोत सिद्धू की पत्नी डा. नवजोत कौर सिद्धू ने अपने फेसबुक पेजों पर भी किया है। इसमें नवजोत सिंह सिद्धू के साथ परगट सिंह, बैंस बंधु सिमरजीत सिंह बैंस और बलविंदर सिंह बैंस की तस्वीर लगी है।

इससे पूर्व जब सिद्धू ने जब राज्‍यसभा से इस्‍तीफा दिया था तो यह कयास लगाए जा रहे थे कि वह केजरीवाल की पार्टी आम आदमी पार्टी में शामिल होंगे।

यह भी कहा जा रहा था कि आप उन्‍हे पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में अपना सीएम कैंडिडेट घोषित कर स‍कती। लेकिन सिद्धू के नयी पार्टी बनाने से इन सभी कयासों पर विराम लग गया। नवजोत सिंह सिद्धू अपनी नयी पार्टी का विधिवत ऐलान 9 सितंबर को कर सकते हैं।

नवजोत सिंह सिद्धू ने बनाई नयी पार्टी

पंजाब राज्य में वर्तमान में शिरोमणी अकाली दल और बीजेपी गठबंधन की सरकार है। कांग्रेस मुख्य विपक्षी पार्टी है, तो संसदीय चुनाव में पहली बार पंजाब से अपना खाता खोलने वाली आम आदमी पार्टी तीसरे विकल्प के लिए खुद को पेश कर रही है। अब सिद्धू की पार्टी के ऐलान के बाद राज्‍य के समीकरण भी बदलेंगे। अभी तक ज्यादातर राजनीतिक जानकार राज्य में अकाली-बीजेपी गठबंधन, कांग्रेस और आप के बीच मुख्य मुकाबला मान रहे हैं।

लेकिन राजनीति संभावनाओं को साधने की कला है । स्थानीय मीडिया की मानें तो अलग-अलग दलों से बारी-बारी बिछड़े या असंतुष्ट नेता पंजाब में चौथा मोर्चा बनाने की कोशिश में हैं। परगट और सिद्धू के नई पार्टी की घोषणा के साथ ही राज्य में चौथे मोर्च की जमीन तैयार हो गई है।

नवजोत सिंह सिद्धू  9 सितंबर को करेंगे अपनी नई पार्टी का ऐलान

नवजोत सिंह सिद्धू अमृतसर लोकसभा सीट से सांसद भी रह चुके हैं। दरअसल प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्‍व वाली पंजाब सरकार के खिलाफ होने से सिद्धू और बीजेपी के साथ रिश्‍तों में काफी खटास आ गई थी। यह खटास 2014 के आम चुनाव में जब अमृतसर सीट से सिद्धू की जगह अरुण जेटली को टिकट दिया गया तो और बढ़ी। हालांकि बीजेपी आलाकमान ने  सिद्धू को राज्‍यसभा सदस्‍यता देकर संतुष्‍ट करने का प्रयास किया था। लेकिन ने हाल ही में राज्‍यसभा से इस्‍तीफा देकर बड़ा धमाका किया। इस्‍तीफा देने के बाद एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में अपना पक्ष रखते हुए उन्‍होंने कहा था, ‘मैंने इस्तीफा दिया क्योंकि मुझसे कहा गया कि पंजाब की तरफ मुंह नहीं करोगे। आखिर मैं अपनी जड़, अपना वतन कैसे छोड़ दूं।’

बीजेपी से दूरी बनाने के बाद नवजोत सिंह सिद्धू के आम आदमी पार्टी अथवा कांग्रेस पार्टी से जुड़ने की चर्चाएं भी थीं, लेकिन सूत्रों के अनुसार, कुछ मुद्दों पर बात अटकने के कारण ऐसा नहीं हो सका।